मनमाने इस्तेमाल से किडनी डैमेज और AMR का खतरा
नई दिल्ली: देश में दर्द निवारक दवाओं (NSAIDs) और एंटीबायोटिक के अंधाधुंध और मनमाने इस्तेमाल पर केंद्र सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) के न्यू ड्रग्स डिवीजन ने एक विस्तृत सर्कुलर जारी करते हुए सभी राज्यों, डॉक्टरों, दवा विक्रेताओं और आम जनता के लिए कड़े दिशा-निर्देश जारी किए हैं। नियामक ने स्पष्ट किया है कि ये दवाएं ड्रग्स रूल्स, 1945 के तहत शेड्यूल H और H1 में आती हैं, इसलिए रजिस्टर्ड डॉक्टर के पर्चे (प्रिस्क्रिप्शन) के बिना इनकी ओवर-द-काउंटर बिक्री पूरी तरह प्रतिबंधित है।
किडनी खराब होने और एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस (AMR) का गंभीर जोखिम
सर्कुलर में चेतावनी दी गई है कि दर्द निवारक और एंटीबायोटिक दवाओं का बिना डॉक्टरी सलाह के लंबे समय तक सेवन शरीर के लिए घातक साबित हो रहा है। पेनकिलर्स का अत्यधिक इस्तेमाल किडनी की गंभीर बीमारी, डिहाइड्रेशन और हृदय संबंधी जटिलताओं को बढ़ा रहा है। वहीं, सामान्य सर्दी-जुकाम जैसे वायरल संक्रमणों में बिना वजह एंटीबायोटिक खाने से शरीर में बैक्टीरिया प्रतिरोधी बन रहे हैं (एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस), जिससे भविष्य में सामान्य संक्रमणों पर भी दवाएं बेअसर हो रही हैं।
आम नागरिकों के लिए स्पष्ट हिदायतें
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खुद से इलाज न करें: सामान्य वायरल इन्फेक्शन या मौसमी बुखार में खुद से एंटीबायोटिक बिल्कुल न लें।
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दवा शेयर न करें: डॉक्टर द्वारा दी गई एंटीबायोटिक का पूरा कोर्स निर्धारित समय और मात्रा में ही पूरा करें। बची हुई दवा दोबारा न खाएं और न ही किसी दूसरे व्यक्ति को दें।
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किडनी मरीज बरतें खास सावधानी: जिन लोगों को किडनी या दिल की बीमारी का पूर्व इतिहास है, वे पेनकिलर लेने से पहले अपने चिकित्सक को इसकी पूरी जानकारी अवश्य दें।
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लक्षण बने रहने पर जांच कराएं: यदि दर्द या बुखार बार-बार लौट रहा है, तो बार-बार पेनकिलर खाने के बजाय तुरंत विशेषज्ञ डॉक्टर से परामर्श लें।
डॉक्टरों और अस्पतालों को निर्देश: ‘कम से कम डोज और सीमित अवधि’
स्वास्थ्य पेशेवरों को सलाह दी गई है कि वे केवल अत्यधिक चिकित्सीय आवश्यकता होने पर ही ये दवाएं लिखें:
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पेनकिलर लिखते समय न्यूनतम प्रभावी खुराक (Lowest Effective Dose) और कम से कम समयावधि को प्राथमिकता दी जाए।
एंटीबायोटिक लिखते समय ‘एंटीमाइक्रोबियल स्टूवर्डशिप’ के सिद्धांतों, संक्रमण की गंभीरता और जहां जरूरी हो, माइक्रोबायोलॉजिकल कल्चर जांच को आधार बनाया जाए।
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गैर-जरूरी कॉम्बिनेशन दवाओं (अनावश्यक फिक्स्ड डोज कॉम्बिनेशन) और लंबी अवधि तक एंटीबायोटिक चलाने से बचने को कहा गया है।
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अस्पतालों को प्रिस्क्रिप्शन ऑडिट (पर्चों की नियमित समीक्षा) करने के निर्देश दिए गए हैं।
दवा दुकानों और फार्मासिस्टों पर सख्ती
सीडीएससीओ ने मेडिकल स्टोर्स और फार्मासिस्टों को कानूनी प्रावधानों की याद दिलाते हुए चेताया है:
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शेड्यूल H और H1 का सख्ती से पालन: अधिकांश दर्द निवारक शेड्यूल H और एंटीबायोटिक शेड्यूल H1 में दर्ज हैं। बिना डॉक्टर के वैध पर्चे के इनकी खुदरा बिक्री करना कानूनन अपराध है।
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सेल्फ-मेडिकेशन को बढ़ावा न दें: दवा विक्रेता ग्राहकों को खुद से एंटीबायोटिक या प्रिस्क्रिप्शन वाली दर्द निवारक दवाएं देने या इसका विकल्प सुझाने से पूरी तरह परहेज करें।
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राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के ड्रग कंट्रोलरों को ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940 का कड़ाई से अनुपालन कराने और नियमों का उल्लंघन करने वाले मेडिकल स्टोर्स पर सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।


