नई दिल्ली: देश में ‘क्विक-कॉमर्स’ और तेज रफ्तार होम डिलिवरी सेवाओं के बढ़ते चलन के बीच दोपहिया वाहन चालकों की सड़क सुरक्षा को लेकर विशेषज्ञों ने गंभीर चिंता जताई है। सड़क सुरक्षा से जुड़े विशेषज्ञों ने दोपहिया वाहनों से सामान पहुंचाने वाले ‘डिलिवरी राइडर्स’ को जानलेवा हादसों से बचाने के लिए सड़कों पर उनके लिए अलग और समर्पित लेन (Dedicated Lane) बनाए जाने की पुरजोर वकालत की है।
‘सेफ्टी, ट्रेनिंग एंड रेगुलेशन ऑफ पावर्ड टू-व्हीलर डिलिवरी राइडर्स’ विषय पर आयोजित एक राष्ट्रीय संगोष्ठी में विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया कि बुनियादी ढांचे में बदलाव किए बिना डिलिवरी कर्मियों के जीवन की सुरक्षा संभव नहीं है।
इंस्टिट्यूट ऑफ रोड ट्रैफिक एजुकेशन (IRTE) के अध्यक्ष रोहित बालूजा ने संगोष्ठी को संबोधित करते हुए कहा कि देश की सड़कों पर दौड़ने वाले कुल वाहनों में दोपहिया वाहनों की हिस्सेदारी लगभग 70 प्रतिशत है। इसके बावजूद जब सड़क के बुनियादी ढांचे (इन्फ्रास्ट्रक्चर) की रूपरेखा तैयार की जाती है या यातायात नियम तय किए जाते हैं, तो दोपहिया चालकों की जरूरतों और सुरक्षा को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया जाता है। उन्होंने रेखांकित किया कि दोपहिया वाहनों के भारी दबाव को देखते हुए अलग ड्राइविंग लेन बनाया जाना वक्त की सबसे बड़ी जरूरत है, जिसका अब तक अभाव रहा है। इसके साथ ही मौजूदा यातायात नियमों का जमीनी स्तर पर कड़ाई से पालन कराया जाना भी बेहद आवश्यक है।
वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (CSIR) से जुड़े केंद्रीय सड़क अनुसंधान संस्थान (CRRI) के मुख्य वैज्ञानिक चलुमुरी रवि शेखर ने खतरनाक आंकड़ों का हवाला देते हुए स्थिति की गंभीरता स्पष्ट की। उन्होंने बताया कि दुनिया भर में सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली सर्वाधिक मौतें भारत में दर्ज होती हैं, और इनमें अकेले दोपहिया वाहन सवारों की हिस्सेदारी लगभग 44 प्रतिशत है।
रवि शेखर ने आगे कहा कि डिलिवरी कंपनियों के कड़े समय-सीमा दबाव और सड़कों पर बढ़ते जोखिम से निपटने के लिए दोपहिया वाहनों में आधुनिक सुरक्षा तकनीकों को शामिल किया जाना चाहिए। इसके साथ ही सख्त ट्रैफिक रेगुलेशन, राइडर्स का नियमित प्रशिक्षण और सड़क सुरक्षा को लेकर व्यापक जन-जागरूकता बढ़ाना अनिवार्य हो गया है ताकि आर्थिक गतिविधियों को रफ्तार देने वाले ये कामगार सुरक्षित घर लौट सकें।


