नई दिल्ली: भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने देश भर के राष्ट्रीय राजमार्गों, एक्सप्रेसवे और टोल रोड प्रोजेक्ट्स के किनारे तथा डिवाइडर को हरा-भरा बनाए रखने के लिए नए और कड़े दिशानिर्देश जारी किए हैं। नए नियमों के अनुसार, राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारे निर्धारित हरित गलियारों में न्यूनतम 80 फीसदी हिस्से पर पौधे लगाना अनिवार्य कर दिया गया है। इसके साथ ही केवल पौधे लगा देना ही काफी नहीं होगा, बल्कि लगाए गए पौधों में से कम से कम 90 फीसदी का जीवित रहना (सर्वाइवल रेट) भी सुनिश्चित करना होगा।
प्राधिकरण ने स्पष्ट किया है कि अब तक केवल पौधारोपण कर इतिश्री कर लेने और बाद में पौधों के सूखने या नष्ट होने की अनदेखी करने की प्रवृत्ति पर पूरी तरह रोक लगाई जाएगी। नए निर्देशों के तहत निर्माण एजेंसियों और ठेकेदारों को प्रोजेक्ट पूरा होने पर मिलने वाला ‘प्रोविजनल सर्टिफिकेट’ तभी जारी किया जाएगा, जब वे वृक्षारोपण और 90 फीसदी जीवित रहने की दर के इन सख्त मानकों पर खरे उतरेंगे।
यदि कोई एजेंसी या ठेकेदार इन दिशा-निर्देशों का पालन करने में विफल रहता है, तो उस पर भारी वित्तीय जुर्माना लगाया जाएगा। यह जुर्माना तब तक निरंतर लगता रहेगा, जब तक कि वृक्षारोपण और पौधों के जीवित रहने का निर्धारित लक्ष्य पूरा नहीं कर लिया जाता। इसके अलावा, यदि कोई पौधा सूख जाता है या खराब होता है, तो उसकी जगह उसी उम्र और आकार का नया पौधा लगाना होगा, ताकि पूरे राष्ट्रीय राजमार्ग पर पेड़-पौधों की ऊंचाई, स्वरूप और निरंतरता में एकरूपता बनी रहे।


