आज से नेशनल हाईवे पर बंद हो गया कैश से टोल भुगतान ,अब केवल फास्टैग और यूपीआई से ही मिलेगी एंट्री
खाड़ी देशों में जारी युद्ध के बीच भारत में एलपीजी सिलिंडर की किल्लत की खबरों ने आम जनता की चिंता बढ़ा दी है, लेकिन इस संकट के बीच साइबर ठगों का एक बड़ा गिरोह सक्रिय हो गया है। जालसाज इस आपदा को अवसर मानकर लोगों को अपना शिकार बना रहे हैं और इंटरनेट पर हजारों की संख्या में फर्जी ऐप, वेबसाइट लिंक और हेल्पलाइन नंबरों का जाल बिछा दिया गया है। गैस सिलिंडर की कमी का डर दिखाकर स्कैमर्स लोगों को जल्दबाजी में भुगतान करने के लिए उकसा रहे हैं। इसी गंभीर स्थिति को देखते हुए केंद्र सरकार की साइबर सिक्योरिटी एजेंसी इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (I4C) ने देशव्यापी अलर्ट जारी किया है।
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ठगी का यह खेल बेहद शातिर तरीके से बुना जाता है जिसमें सोशल मीडिया, व्हाट्सएप और एसएमएस के जरिए मैसेज भेजकर यह दावा किया जाता है कि स्टॉक सीमित है और यदि तुरंत बुकिंग नहीं की गई तो अवसर हाथ से निकल जाएगा। ठग अक्सर कम कीमत या भारी डिस्काउंट का लालच देते हैं और मैसेज में एक ऐसा लिंक भेजते हैं जो दिखने में बिल्कुल असली गैस कंपनी की वेबसाइट जैसा होता है। कई मामलों में जालसाज उपभोक्ताओं को अनजान एपीके (APK) फाइल डाउनलोड करने या पेमेंट के लिए क्यूआर कोड स्कैन करने का दबाव बनाते हैं। जैसे ही कोई व्यक्ति इन लिंक पर अपनी जानकारी दर्ज करता है या ओटीपी साझा करता है, हैकर्स पल भर में उनके बैंक खाते तक पहुंच जाते हैं।
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सरकार ने इन खतरों को पहचानने के लिए कुछ स्पष्ट संकेत जारी किए हैं। यदि कोई संदेश गैस की कमी का हवाला देकर तुरंत बुकिंग के लिए मानसिक दबाव बनाए या आपको किसी अनौपचारिक वेबसाइट पर ले जाए, तो वह निश्चित रूप से ठगी की कोशिश है। सुरक्षित रहने के लिए यह अनिवार्य है कि उपभोक्ता हमेशा गैस कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट या उनके वेरिफाइड मोबाइल ऐप का ही उपयोग करें। किसी भी अनजान माध्यम से ऐप डाउनलोड न करें और अपना ओटीपी या यूपीआई पिन कभी किसी के साथ साझा न करें। किसी भी संदिग्ध संदेश की स्थिति में तुरंत अपनी गैस एजेंसी से संपर्क करना ही समझदारी है ताकि आप अपनी मेहनत की कमाई को सुरक्षित रख सकें।


