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मध्यम वर्ग को बड़ी राहत अब 12 लाख रुपये तक की आय होगी टैक्स फ्री और जीएसटी 2.0 के लागू होने से दवाएं और बीमा होंगे सस्ते
भारत में 1 अप्रैल 2026 से आर्थिक मोर्चे पर एक ऐतिहासिक परिवर्तन होने जा रहा है। सरकार ने साठ साल पुराने आयकर कानून को बदलकर अब आयकर अधिनियम 2025 को अमल में लाने का फैसला किया है। इसके साथ ही जीएसटी 2.0 के तहत घोषित नई दरें भी प्रभावी हो जाएंगी। इन बदलावों के बीच जहाँ एक ओर टैक्स के मोर्चे पर आम आदमी को राहत मिली है वहीं दूसरी ओर वैश्विक तनाव और नए नियमों के कारण रसोई गैस दवाएं और कारें महंगी होने जा रही हैं।
आयकर और टैक्स में बड़े बदलाव
नए कानून के तहत असेसमेंट ईयर का झंझट खत्म कर इसे अब सीधे टैक्स ईयर 2026 27 कहा जाएगा। सबसे बड़ी राहत 12 लाख रुपये तक की शुद्ध वार्षिक आय वालों को मिली है जिनकी टैक्स देनदारी अब शून्य होगी। वेतनभोगियों के लिए 75000 रुपये का स्टैंडर्ड डिडक्शन जारी रहेगा। पुरानी टैक्स व्यवस्था चुनने वालों के लिए बच्चों का शिक्षा भत्ता 100 रुपये से बढ़ाकर 3000 रुपये और हॉस्टल भत्ता 9000 रुपये प्रति माह कर दिया गया है। पुणे बेंगलुरु हैदराबाद और अहमदाबाद को भी एचआरए के लिए टियर 1 श्रेणी में शामिल किया गया है जिससे वहां रहने वालों को 50 प्रतिशत की छूट मिलेगी।
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जीएसटी 2.0 और महंगाई का गणित
नई जीएसटी व्यवस्था में अब मुख्य रूप से 5 प्रतिशत 18 प्रतिशत और 40 प्रतिशत के स्लैब होंगे। राहत की बात यह है कि स्वास्थ्य और जीवन बीमा के साथ 33 जीवन रक्षक दवाओं और डेयरी उत्पादों को पूरी तरह टैक्स फ्री कर दिया गया है। छोटे एसी टीवी और कारें अब 18 प्रतिशत के स्लैब में आने से सस्ती होंगी। हालांकि तंबाकू लग्जरी कारों और ऑनलाइन गेमिंग पर अब 40 प्रतिशत की दर से टैक्स लगेगा। दूसरी तरफ पश्चिम एशिया में तनाव के चलते घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत दिल्ली में 913 रुपये तक पहुँच गई है। साथ ही 900 से अधिक आवश्यक दवाओं की कीमतों में भी 1.74 प्रतिशत की वृद्धि को मंजूरी दी गई है।
बैंकिंग और निवेश के नए नियम
बैंकिंग और निवेश के क्षेत्र में भी कड़े नियम लागू हो रहे हैं। अब नया पैन कार्ड बनवाने के लिए आधार के साथ 10वीं का सर्टिफिकेट या जन्म प्रमाण पत्र अनिवार्य होगा। डिजिटल पेमेंट की सुरक्षा के लिए बायोमेट्रिक जैसे डायनामिक फैक्टर जरूरी कर दिए गए हैं। एनपीएस से अब रिटायरमेंट पर 80 प्रतिशत तक राशि एकमुश्त निकाली जा सकेगी। हेल्थ इंश्योरेंस के मामले में बड़ी राहत यह है कि 5 साल तक प्रीमियम भरने के बाद कंपनियां किसी पुरानी बीमारी का बहाना बनाकर क्लेम खारिज नहीं कर सकेंगी।
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रेलवे और सड़क यात्रा के नियम
सफर करने वालों के लिए भी कुछ चुनौतियां बढ़ी हैं। भारतीय रेलवे के नए नियम के अनुसार अब ट्रेन प्रस्थान से 8 घंटे के भीतर कन्फर्म टिकट कैंसिल करने पर कोई रिफंड नहीं मिलेगा। साथ ही फास्टैग का एनुअल पास भी अब महंगा होकर 3075 रुपये का हो गया है। बीएस 7 उत्सर्जन मानकों के कारण कारों की कीमतों में भी 25000 से 65000 रुपये तक की बढ़ोतरी हुई है।
सरकार इन बदलावों के जरिए अर्थव्यवस्था को अधिक डिजिटल और पारदर्शी बनाने का प्रयास कर रही है। जहाँ मिडिल क्लास को टैक्स में बड़ी छूट और सस्ती स्वास्थ्य सेवाओं का उपहार मिला है वहीं वैश्विक अस्थिरता के कारण बढ़ती महंगाई घरेलू बजट पर दबाव भी बनाएगी।
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