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नई दिल्ली: भारत के ग्रामीण अंचलों में ‘हर घर जल’ पहुँचाने के साथ-साथ अब सरकार का पूरा ध्यान उस पानी की शुद्धता और गुणवत्ता पर केंद्रित हो गया है। जल जीवन मिशन (JJM) के तहत देश ने एक ऐसी उपलब्धि हासिल की है, जहाँ अब पानी की शुद्धता केवल कागजों पर नहीं, बल्कि अत्याधुनिक प्रयोगशालाओं की कसौटी पर परखी जा रही है।

तकनीक और पारदर्शिता का संगम केंद्रीय जल शक्ति राज्य मंत्री श्री वी. सोमन्ना ने राज्यसभा में साझा किया कि देश में अब 2,870 जल गुणवत्ता परीक्षण प्रयोगशालाओं का एक विस्तृत नेटवर्क काम कर रहा है। इसे डिजिटल रूप देने के लिए JJM-WQMIS पोर्टल शुरू किया गया है, जो पानी के नमूने लेने से लेकर उनकी रिपोर्ट जारी करने तक की पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाता है। अब कोई भी नागरिक घर बैठे अपने गांव की जलापूर्ति की गुणवत्ता की स्थिति ऑनलाइन देख सकता है।

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सिर्फ सरकारी जांच नहीं, जन-सुविधा भी इस पहल की सबसे बड़ी विशेषता इसका जन-केंद्रित होना है। सरकार ने राज्यों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि इन प्रयोगशालाओं के दरवाजे आम जनता के लिए भी खोले जाएं। अब कोई भी व्यक्ति अपने घर के पानी की जांच नाममात्र शुल्क देकर करा सकता है। यह न केवल लोगों में जागरूकता बढ़ाएगा, बल्कि जल जनित बीमारियों के खिलाफ एक सुरक्षा कवच भी तैयार करेगा।

मान्यता और सटीकता पर जोर आंकड़ों के अनुसार, इन 2,870 लैब में से 1,707 प्रयोगशालाएं पूरी तरह से मान्यता प्राप्त (Accredited) हो चुकी हैं। उत्तर प्रदेश से लेकर पश्चिम बंगाल और गुजरात से लेकर तमिलनाडु तक, राज्य और जिला स्तर पर ऐसी सुविधाएं तैयार की गई हैं जो अंतरराष्ट्रीय मानकों पर पानी को परखती हैं। विशेष रूप से तमिलनाडु जैसे राज्यों में शत-प्रतिशत प्रयोगशालाएं मान्यता प्राप्त हैं, जो विश्वसनीयता की दिशा में एक बड़ा कदम है।

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स्रोत से लेकर नल तक निगरानी दिसंबर 2024 में जारी नई गाइडलाइन्स के बाद, पानी की जांच का दायरा बढ़ा दिया गया है। अब केवल कुएं या नदी (स्रोत) की जांच नहीं होती, बल्कि वाटर ट्रीटमेंट प्लांट, स्टोरेज टैंक और अंतिम छोर पर लगे नल तक, हर पड़ाव पर पानी की गुणवत्ता जांची जा रही है। पीपीपी (PPP) मॉडल के जरिए निजी क्षेत्र को भी इस अभियान से जोड़ा जा रहा है ताकि इस नेटवर्क को और भी सुदृढ़ बनाया जा सके।

निष्कर्ष साफ पानी केवल एक सुविधा नहीं, बल्कि एक अधिकार है। प्रयोगशालाओं का यह बढ़ता ग्राफ और डिजिटल निगरानी प्रणाली इस बात का प्रमाण है कि भारत अब ‘क्वालिटी कंट्रोल’ के जरिए ग्रामीण स्वास्थ्य के एक नए युग की ओर कदम बढ़ा चुका है।

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