विशेष रिपोर्ट | बिलासपुर/रायपुर:
भारतीय रेल को अधिक सुरक्षित, विश्वसनीय और अत्याधुनिक बनाने की दिशा में दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे ने एक बड़ी सफलता हासिल की है। रेलवे अपने पूरे 2430 रूट किलोमीटर नेटवर्क पर भारत की स्वदेशी ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन प्रणाली ‘कवच’ को लागू करने के लिए युद्धस्तर पर काम कर रहा है। इसके तहत पटरियों के साथ ऑप्टिकल फाइबर केबल बिछाने, संचार टावरों को स्थापित करने और इंजनों में उपकरण लगाने का काम तेजी से चल रहा है। इस पूरी योजना के तहत अब तक रेलवे के 238 लोकोमोटिव इंजनों में कवच किट सफलतापूर्वक स्थापित की जा चुकी है।
कवच परियोजना का काम बिलासपुर, नागपुर और रायपुर मंडलों में तेजी से आगे बढ़ रहा है। बिलासपुर-चांपा रेलखंड पर इसका फील्ड ट्रायल सफलतापूर्वक पूरा हो चुका है, जबकि बिलासपुर-रायगढ़ खंड में कमीशनिंग का काम जारी है। नागपुर मंडल में नागपुर-दुर्ग रेलखंड पर लोको ट्रायल किए जा रहे हैं, जहां हाल ही में कलमना-सालवा के 25 किलोमीटर लंबे ट्रैक पर स्वचालित ब्रेकिंग, सिग्नल रिस्पॉन्स और आपातकालीन प्रणाली का सफल परीक्षण किया गया। इसी तरह रायपुर मंडल के दुर्ग-मांढर रेलखंड पर भी काम तय समयसीमा के अनुसार पूरा किया जा रहा है।
कवच प्रणाली अनुसंधान अभिकल्प एवं मानक संगठन द्वारा विकसित एक विश्वस्तरीय स्वदेशी ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन तकनीक है। यह प्रणाली ट्रेन चालक को केबिन के अंदर ही रियल-टाइम में सिग्नल, स्पीड लिमिट और दूरी की सटीक जानकारी देती है। यदि लोको पायलट निर्धारित गति सीमा का उल्लंघन करता है या खतरे वाले सिग्नल को पार करने की स्थिति बनती है, तो यह प्रणाली स्वतः ब्रेक लगाकर ट्रेन को रोक देती है। इसके अलावा, एक ही ट्रैक पर ट्रेनों की संभावित भिड़ंत रोकने, घने कोहरे में सुरक्षित संचालन सुनिश्चित करने, आपात स्थिति में आसपास की ट्रेनों को रोकने और रेलवे फाटक के पास अपने आप हॉर्न बजाने जैसे मामलों में यह तकनीक बेहद असरदार साबित हो रही है।

