रांची/रायपुर: झारखंड, छत्तीसगढ़ और बिहार के वनांचल एवं ग्रामीण अंचलों में प्रकृति व भाई-बहन के प्रेम का महापर्व ‘करमा’ पूरे पारंपरिक उल्लास के साथ शुरू हो गया है। सरहुल के बाद जनजातीय समुदाय के इस सबसे बड़े पर्व की मुख्य पूजा 25 सितंबर 2026 को विधि-विधान से संपन्न होगी। हालांकि, पर्व का अनुष्ठान मुख्य पूजा से सात दिन पहले ही ‘जावा’ उठाने की रस्म के साथ शुरू हो चुका है, जहां युवतियां कड़े नियमों और संयम के साथ इस लोक उत्सव को मनाने में जुटी हैं।

‘जावा’ उठाने की रस्म से हुआ आगाज, अंकुरित बीज देंगे समृद्धि का संदेश

करमा पर्व की शुरुआत तीज के पारण के बाद पारंपरिक विधि से की जाती है:

  • 7 अनाजों से सजती है डलिया: युवतियां समूह बनाकर नदी या तालाब के तट पर स्नान-ध्यान करती हैं और बांस की नई डलिया में पवित्र बालू लेकर आती हैं। इसमें धान, मकई, जौ, चना, गेहूं समेत सात प्रकार के अन्न के बीज बोए जाते हैं।

  • हल्दी के पानी से सेवा: अगले सात दिनों तक युवतियां सुबह खाली पेट स्नान कर जावा में हल्दी का पानी डालती हैं और नियम-संयम का पालन करती हैं। बालू में बीजों का अंकुरित होकर हरी पत्तियों में बदलना जीवन में नई उमंग, अच्छी फसल और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है।

  • भाई-बहन के स्नेह का प्रतीक: करमा पूजा में बहनें अपने भाइयों की दीर्घायु, स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि की मंगलकामना करती हैं।

करमा पूजा की थाली: इन 5 पारंपरिक पकवानों से घुलता है देसी स्वाद

पूजा-अनुष्ठान के साथ ही लोक परंपरा में स्थानीय अनाजों और दालों से बने पारंपरिक व्यंजनों का विशेष महत्व है। इस बार की थाली को खास बनाने वाले 5 प्रमुख पकवान:

  • 1. पारंपरिक धुस्का: चावल और चना या उड़द दाल को भिगोकर पीसा जाता है। इसके घोल को मसालों के साथ तेल में कुरकुरा तला जाता है। इसे पारंपरिक रूप से चने की घुघनी या रसेदार आलू की सब्जी के साथ परोसा जाता है।

  • 2. चावल की खीर: पूजा के प्रसाद के लिए दूध, चावल, गुड़ या चीनी, इलायची और मेवों से धीमी आंच पर तैयार की जाने वाली यह खीर शुद्धता और सादगी का प्रतीक है।

  • 3. गुड़ का अरसा: चावल के आटे और गुड़ की चाशनी से बनने वाला अरसा करमा पर्व की खास पहचान है। तेल में तली जाने वाली यह पारंपरिक मिठाई कई दिनों तक सुरक्षित रहती है।

  • 4. कुरकुरा ठेकुआ: गेहूं का आटा, घी और गुड़ के घोल से गूंथकर धीमी आंच पर तला जाने वाला ठेकुआ त्योहार की थाली का मुख्य आकर्षण होता है।

  • 5. चना दाल पकौड़ी: दरदरी पिसी चना दाल में हरी मिर्च, अदरक और हल्के देसी मसालों को मिलाकर तैयार की जाने वाली यह कुरकुरी पकौड़ी नमकीन स्वाद के रूप में पसंद की जाती है।

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