नई दिल्ली। भारत की डिजिटल जीवनरेखा बन चुका ‘आधार’ अब एक क्रांतिकारी बदलाव के मुहाने पर खड़ा है। देश में बढ़ते साइबर खतरों और डिजिटल सेवाओं के अभूतपूर्व विस्तार को देखते हुए केंद्र सरकार ने ‘आधार विजन 2032’ का रोडमैप तैयार कर लिया है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य आधार के वर्तमान तकनीकी ढांचे को भविष्य की चुनौतियों के अनुरूप ढालना और इसे पूरी तरह ‘फ्रॉड-प्रूफ’ बनाना है।

फिंगरप्रिंट का दौर खत्म, चेहरा होगा नई चाबी
इस बदलाव की सबसे बड़ी धमक ऑथेंटिकेशन के तरीके में महसूस की जाएगी। अब तक हम अपनी पहचान के लिए अंगूठे के निशान (Fingerprint) पर निर्भर थे, लेकिन अब सरकार फेशियल रिकग्निशन (चेहरे की पहचान) को प्राथमिक माध्यम बनाने जा रही है। वर्तमान में जहाँ हर महीने करीब 1 करोड़ लोग चेहरे के जरिए वेरिफिकेशन कराते हैं, वहीं सरकार का लक्ष्य इस आंकड़े को 100 करोड़ तक पहुँचाना है।

इससे न केवल बुजुर्गों और शारीरिक श्रम करने वाले लोगों को होने वाली फिंगरप्रिंट मिसमैच की समस्या खत्म होगी, बल्कि प्रक्रिया भी और तेज हो जाएगी।
AI और ब्लॉकचेन से मिलेगी अभेद्य सुरक्षा
आधार को सुरक्षित बनाने के लिए सरकार महज सुधार नहीं, बल्कि पूरी तकनीक बदलने जा रही है। विजन 2032 के तहत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), क्लाउड कंप्यूटिंग, और ब्लॉकचेन जैसी तकनीकों का समावेश किया जाएगा। यहाँ तक कि भविष्य के ‘क्वांटम कंप्यूटिंग’ खतरों से निपटने के लिए भी सुरक्षा कवच तैयार किया जा रहा है। आधार के सीईओ भुवनेश कुमार का मानना है कि AI की मदद से फेशियल डेटा का वेरिफिकेशन इतना सटीक होगा कि पहचान की चोरी करना नामुमकिन जैसा हो जाएगा।

सितंबर 2026 तक का मौका: मुफ्त बायोमेट्रिक अपडेट

बढ़ती उम्र के साथ बच्चों और किशोरों के शारीरिक बदलाव पहचान में बाधा न बनें, इसके लिए सरकार ने 5 करोड़ युवाओं के डेटा को पहले ही अपडेट कर लिया है। राहत की बात यह है कि बायोमेट्रिक अपडेट की यह सुविधा सितंबर 2026 तक पूरी तरह निशुल्क जारी रहेगी। सरकार की मंशा साफ है—तकनीकी बदलाव के इस दौर में किसी भी नागरिक की पहचान का रिकॉर्ड पुराना न पड़े।

दिग्गजों की टीम लिख रही है नया इतिहास
इस मेगा प्रोजेक्ट को धरातल पर उतारने के लिए UIDAI चेयरमैन नीलकांत मिश्रा की अगुवाई में एक हाई-पावर कमेटी काम कर रही है। इसमें न्यूटनिक्स और सर्वम् AI जैसे बड़े संस्थानों के विशेषज्ञ शामिल हैं। यह समिति अगले महीने अपनी रिपोर्ट को अंतिम रूप देगी, जिसके आधार पर मार्च में नया ढांचा पेश किया जाएगा। चूंकि मौजूदा तकनीकी कॉन्ट्रैक्ट 2027 में समाप्त हो रहा है, इसलिए 2032 तक के लिए नए सिरे से तकनीकी साझेदारी की जाएगी।
कुल मिलाकर, आधार अब केवल एक कार्ड नहीं बल्कि एक स्मार्ट और सुरक्षित ‘डिजिटल एसेट’ बनने की राह पर है, जहाँ आपकी सुरक्षा की जिम्मेदारी अत्याधुनिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के हाथों में होगी।

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