नई दिल्ली।
संसद के उच्च सदन (राज्यसभा) ने बुधवार को ‘राष्ट्र गौरव अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक, 2026’ को ध्वनिमत से पारित कर दिया। इस ऐतिहासिक विधेयक के कानून बनने के साथ ही अब राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ के गायन में बाधा डालने, उसका अनादर करने या अपमान करने पर 3 साल तक की कैद, जुर्माना या दोनों की सजा का कड़ा प्रावधान कर दिया गया है।
यह विधेयक जब सदन में चर्चा के बाद पास हुआ, उस समय विपक्षी दलों के सदस्य सदन में मौजूद नहीं थे। विपक्षी सांसदों ने गृह मंत्री की अनुपस्थिति समेत अन्य मुद्दों को लेकर पहले ही सदन से वॉकआउट कर दिया था।
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“तुष्टीकरण के कारण ‘वंदे मातरम्’ को नहीं मिला उचित सम्मान”: नित्यानंद राय
विधेयक पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने कहा कि यह कानून देशवासियों की भावनाओं और राष्ट्रगीत के सम्मान को ध्यान में रखकर लाया गया है।
उन्होंने कांग्रेस पर तीखा हमला बोलते हुए कहा, “वंदे मातरम् स्वतंत्रता संग्राम के दौरान हर भारतीय की प्रेरणा और प्रिय नारा था। लेकिन आजादी के बाद तुष्टीकरण की राजनीति के कारण इसे वह उचित सम्मान नहीं दिया गया, जिसका यह हकदार था। इसी नीति के तहत इसके केवल दो अंतरों (छंदों) को ही सरकारी कार्यक्रमों में स्वीकार किया गया था।”
गृह राज्य मंत्री ने इतिहास का स्मरण कराते हुए बताया कि आजादी के पहले दिन सरदार वल्लभभाई पटेल के विशेष निर्देश पर प्रसिद्ध संगीतकार पंडित ओंकार नाथ ठाकुर ने आकाशवाणी पर पूरा ‘वंदे मातरम्’ गाया था।
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क्यों पड़ी इस संशोधन विधेयक की जरूरत?
1971 के मूल अधिनियम में संशोधन करने वाले इस नए विधेयक के ‘उद्देश्यों और कारणों’ में स्पष्ट किया गया है कि:
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समान दर्जे का संकल्प: 24 जनवरी 1950 को संविधान सभा के ऐतिहासिक सत्र में प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने ‘वंदे मातरम्’ को राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ के समान दर्जा देने का ऐलान किया था।
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कानूनी तंत्र का अभाव: अब तक देश में ऐसा कोई कठोर कानून मौजूद नहीं था जो राष्ट्रगीत के प्रति होने वाले किसी भी प्रकार के अनादर या बाधा डालने की घटना को रोक सके।
इसी कानूनी कमी को दूर करने और राष्ट्रगीत के गौरव की रक्षा के लिए ‘राष्ट्र गौरव अपमान निवारण अधिनियम, 1971’ में यह नया संशोधन किया गया है।



