सरगुजा जिले के बतौली/ शहर में भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) की बतौली शाखा से जुड़े एक गंभीर मामले में एक महिला शिक्षक ने बैंक और रिकवरी एजेंट पर आर्थिक, मानसिक एवं सामाजिक प्रताड़ना के गंभीर आरोप लगाए हैं। पीड़िता राजेश्वरी सिंह (42 वर्ष), पति श्री राम सिंह, निवासी ग्राम सिलमा, थाना बतौली, जिला सरगुजा ने दावा किया है कि उनके नाम पर जारी एसबीआई क्रेडिट कार्ड को उन्होंने कभी सक्रिय (एक्टिवेट) नहीं किया, इसके बावजूद उनके वेतन खाते से 1 अक्टूबर 2025 को ₹27,760 की राशि ईएमआई के रूप में काट ली गई।
*बिना एक्टिवेट हुए क्रेडिट कार्ड से EMI वसूली महिला शिक्षक ने SBI पर लगाए गंभीर आरोप*
पीड़िता के अनुसार, राशि कटने की जानकारी मिलने के बाद उन्होंने 3 अक्टूबर को एसबीआई बतौली शाखा से संपर्क किया, लेकिन उन्हें स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई।
*बाद में पता चला कि यह कटौती उनके नाम पर जारी क्रेडिट कार्ड से संबंधित ईएमआई के रूप में की गई है।*
*जन्मतिथि की त्रुटि के कारण कार्ड नहीं हुआ सक्रिय*
महिला शिक्षक का कहना है कि क्रेडिट कार्ड में जन्मतिथि (Date of Birth) संबंधी त्रुटि थी, जिसके कारण कार्ड कभी सक्रिय नहीं हो पाया। उनका आरोप है कि प्रारंभिक स्तर पर बैंक अधिकारियों ने गलती स्वीकार करते हुए राशि वापस करने का आश्वासन दिया था, लेकिन बाद में समस्या का समाधान करने के बजाय मामला रिकवरी प्रक्रिया तक पहुंच गया।
*रिकवरी एजेंट पर अभद्र व्यवहार और मानसिक दबाव के आरोप*
पीड़िता ने आरोप लगाया है कि पिछले लगभग आठ महीनों से उन्हें लगातार रिकवरी के नाम पर फोन कॉल और व्हाट्सएप संदेश भेजे जा रहे हैं। उनका कहना है कि रिकवरी एजेंट द्वारा अभद्र एवं अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल किया गया, देर रात तक संदेश भेजकर मानसिक दबाव बनाया गया तथा उन्हें लगातार परेशान किया गया।
महिला शिक्षक का आरोप है कि रिकवरी एजेंट ने उनके सहकर्मियों, विकासखंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ), एसडीएम तथा गांव के सरपंच का नाम लेकर दबाव बनाने की कोशिश की। इतना ही नहीं, इन व्यक्तियों के संपर्क नंबर व्हाट्सएप पर भेजकर सामाजिक प्रतिष्ठा को प्रभावित करने और मानसिक रूप से प्रताड़ित करने का प्रयास किया गया
*क्रेडिट कार्ड इनएक्टिव, फिर भी EMI कटौती का आरोप; महिला शिक्षक ने बैंक और रिकवरी एजेंट पर लगाए गंभीर आरोप*
डेटा सुरक्षा पर उठे गंभीर सवाल
मामले में सबसे गंभीर प्रश्न ग्राहकों की गोपनीयता और बैंकिंग डेटा सुरक्षा को लेकर खड़े हुए हैं। पीड़िता ने सवाल उठाया है कि उनके निजी संपर्क, कार्यालय से जुड़े अधिकारियों तथा अन्य व्यक्तियों की जानकारी रिकवरी एजेंट तक कैसे पहुंची। यदि यह जानकारी बैंकिंग रिकॉर्ड या अन्य माध्यमों से साझा हुई है तो इसकी स्वतंत्र जांच आवश्यक है।
*वेतन खाते से कटौती से बढ़ी आर्थिक परेशानी*
पीड़िता ने बताया कि संबंधित बैंक खाता उनका वेतन खाता है। विवादित राशि की कटौती और लगातार रिकवरी दबाव के कारण उन्हें खाते का सीमित उपयोग करना पड़ा, जिससे दैनिक खर्चों, पारिवारिक जिम्मेदारियों और आर्थिक प्रबंधन में गंभीर कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।
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निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग
महिला शिक्षक ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने, खाते से काटी गई राशि वापस करने, कथित डेटा लीक की जांच करने तथा रिकवरी एजेंट द्वारा किए गए कथित अभद्र व्यवहार पर कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि क्रेडिट कार्ड कभी सक्रिय नहीं हुआ, तो खाते से राशि किस आधार पर काटी गई और उस राशि का लाभ किसे मिला, इसकी स्पष्ट जांच होनी चाहिए।
*शिक्षक की वेतन खाते से कटे ₹27,760, फिर शुरू हुई रिकवरी: महिला शिक्षक ने मांगी निष्पक्ष जांच*
*सबसे बड़ा सवाल यह है बैंक का पक्ष* इस संबंध में जब एसबीआई की संबंधित शाखा से पक्ष जानने का प्रयास किया गया, तो कोई स्पष्ट जवाब प्राप्त नहीं हो सका। शाखा स्तर पर मामले में जिम्मेदारी लेने से बचने का प्रयास किया गया। बैंक का आधिकारिक पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।


