अम्बिकापुर। सरगुजा जिला मुख्यालय अम्बिकापुर के बिशुनपुर रोड स्थित बाल संप्रेक्षण गृह (Juvenile Observation Home) से सुरक्षा व्यवस्था को धता बताते हुए मंगलवार देर शाम 11 अपचारी बालक फरार हो गए। शहर में हो रही तेज बारिश और बादलों की गरज-चमक का फायदा उठाकर इन बालकों ने पहले कमरे की लोहे की खिड़की उखाड़ी और फिर पीछे की बाउंड्रीवॉल फांदकर भाग निकले।

इस बड़ी घटना से संप्रेक्षण गृह प्रबंधन और जिला प्रशासन में हड़कंप मच गया है। सूचना मिलते ही गांधीनगर थाना पुलिस और जेल अमला अलर्ट मोड पर आ गया है और फरार बालकों की सरगर्मी से तलाश शुरू कर दी गई है।

भोजन के बाद योजनाबद्ध तरीके से दिया घटना को अंजाम

हाउस फादर मनीष कुशवाहा ने बताया कि यह सनसनीखेज घटना मंगलवार रात लगभग 7:30 बजे की है। रात का भोजन करने के बाद सभी बच्चे अपने-अपने कमरों में चले गए थे। कुछ बच्चे कमरे में टीवी देख रहे थे, तभी मौका पाकर कुछ अपचारी बालकों ने कमरे की मजबूत खिड़की को उखाड़ दिया। उस समय बाहर मूसलाधार बारिश हो रही थी और बादल कड़क रहे थे, जिसके कारण मुख्य गेट पर तैनात दो सुरक्षाकर्मियों को खिड़की टूटने की भनक तक नहीं लगी। आवाज दबने का फायदा उठाकर सभी 11 बालक एक-एक कर पीछे की दीवार फांदकर रफूचक्कर हो गए।

हत्या, चोरी और दुष्कर्म जैसे गंभीर मामलों के हैं आरोपी

फरार हुए अपचारी बालकों की उम्र 14 से 17 वर्ष के बीच है। ये बालक सरगुजा, सूरजपुर और कोरिया जिले के रहने वाले हैं। प्रबंधन के मुताबिक, फरार होने वाले लड़कों में मामूली अपराधों के नहीं, बल्कि हत्या (Murder), चोरी और दुष्कर्म (Rape) जैसे संगीन मामलों के आरोपी शामिल हैं। गंभीर मामलों के आरोपियों के इस तरह सामूहिक रूप से फरार होने के बाद पुलिस ने शहर के बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन और शहर से बाहर जाने वाले सभी मुख्य मार्गों पर नाकाबंदी कर चेकिंग बढ़ा दी है।

सुरक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल, सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही पुलिस

अम्बिकापुर के इस बाल संप्रेक्षण गृह से बालकों के भागने की यह कोई पहली घटना नहीं है। इससे पहले भी कई बार यहां से बच्चे फरार हो चुके हैं, जिससे इसकी सुरक्षा पर लगातार सवाल उठते रहे हैं। स्थानीय लोगों और जानकारों का कहना है कि संप्रेक्षण गृह परिसर की दीवारों की ऊंचाई काफी कम है और पीछे के संवेदनशील हिस्सों में पर्याप्त रोशनी व सुरक्षा प्रहरी तैनात नहीं रहते।

फिलहाल, गांधीनगर पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचकर जांच में जुट गए हैं। सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि बैरक के भीतर खिड़की उखाड़ने के लिए इन बच्चों के पास कटर या लोहे के औजार कहां से आए? पुलिस इस बात की जांच के लिए परिसर में लगे सीसीटीवी (CCTV) कैमरों के फुटेज खंगाल रही है। घटना की आधिकारिक रिपोर्ट जिला प्रशासन और बाल कल्याण समिति (CWC) को सौंप दी गई है।

शहर के ‘आदतन’ शातिर बालक पर मास्टरमाइंड होने का शक

हाउस फादर मनीष कुशवाहा ने आशंका जताई है कि इस पूरी साजिश के पीछे अम्बिकापुर शहर का ही एक अपचारी बालक हो सकता है। वह आदतन अपराधी है और शहर के अलग-अलग थानों में दर्ज मामलों के कारण कई बार इस संप्रेक्षण गृह में आ चुका है। कयास लगाए जा रहे हैं कि उसी ने बाकी बच्चों को उकसाकर और अपने विश्वास में लेकर भागने का प्लान तैयार किया था।

प्रबंधन को जल्द वापसी की उम्मीद

हालांकि, संप्रेक्षण गृह प्रबंधन को उम्मीद है कि बुधवार शाम तक सभी बालकों को वापस ढूंढ लिया जाएगा। पूर्व के अनुभवों के आधार पर अधिकारियों का कहना है कि कई बार बच्चे भागकर सीधे अपने घर पहुंच जाते हैं और बदनामी के डर से उनके माता-पिता खुद उन्हें वापस छोड़ जाते हैं। पुलिस की अलग-अलग टीमें फिलहाल फरार बच्चों के परिजनों से संपर्क साध रही हैं और उनके संभावित ठिकानों पर लगातार दबिश दी जा रही है।

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