नई दिल्ली। फैटी लिवर, सिकल सेल, थैलेसीमिया और कब्ज के साथ पेट दर्द (IBS-C) जैसी गंभीर समस्याओं से जूझ रहे मरीजों के लिए राहत भरी खबर है। केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) की विषय विशेषज्ञ समितियों (SEC) ने कई नई जीवनरक्षक दवाओं के तीसरे और चौथे चरण के क्लिनिकल ट्रायल को आगे बढ़ाने की सिफारिश की है। इसके साथ ही एसिडिटी की प्रचलित दवा ‘वोनोप्रीजन’ के मनमाने इस्तेमाल पर रोक लगाते हुए इसकी बिक्री केवल गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट की पर्ची (Prescription) पर ही करने की सख्त शर्त तय की गई है।
बिना सलाह एसिडिटी की दवाएं लेने से किडनी और आंतों को नुकसान
विशेषज्ञों के मुताबिक, बिना डॉक्टरी सलाह के लंबे समय तक एसिडिटी और गैस की दवाएं लेने से शरीर में विटामिन बी-12 और मैग्नीशियम की भारी कमी हो सकती है। इसके अलावा आंतों में संक्रमण (इन्फेक्शन) का खतरा बढ़ जाता है और किडनी को भी गंभीर नुकसान पहुंच सकता है। इसी जोखिम को देखते हुए विशेषज्ञ समिति ने वोनोप्रीजन (Vonoprazan 10mg और 20mg) के निर्माण, बिक्री और जैव-समानता अध्ययन की अनुमति की सिफारिश तो की है, लेकिन इसकी खुदरा बिक्री विशेषज्ञ डॉक्टर के पर्चे पर ही अनिवार्य करने का नियम लागू किया है।

10 लाख कर्मचारियों के महंगाई भत्ते पर हलचल: 2% DA बढ़ोतरी की तैयारी, दीपावली से पहले 4 किस्तों में मिल सकता है एरियर

किन दवाओं और बीमारियों के लिए हुई सिफारिशें?

  • फैटी लिवर और फाइब्रोसिस (एफिमोस्फेरमिन अल्फा व रेसमेटिरोम):
    • एफिमोस्फेरमिन अल्फा (Efimofermin Alfa): इस दवा के तीसरे चरण के परीक्षण को हरी झंडी दी गई है। यह फैटी लिवर के उन मरीजों के लिए प्रभावी है, जिनमें बीमारी के कारण लिवर में सूजन और फाइब्रोसिस (लिवर टिशू का सख्त होना) का खतरा बढ़ जाता है।
    • रेसमेटिरोम (Resmetirom): इसके फेज-3 ट्रायल में बदलाव की सिफारिश की गई है। इसके तहत इलाज की अवधि 52 सप्ताह रखी जाएगी और दवा की प्रभावशीलता का मुख्य आधार लिवर बायोप्सी के जरिए फाइब्रोसिस में सुधार को माना जाएगा।

      अब 28 नहीं पूरे 30 दिनों की होगी मोबाइल रिचार्ज की वैलिडिटी, ट्राई के नए नियमों

  • कब्ज और पेट दर्द में नया विकल्प (लिनाक्लोटाइड):
  • सिकल सेल और थैलेसीमिया (एटावोपिवैट):
    • सिकल सेल और थैलेसीमिया जैसी रक्त विकारों से जुड़ी बीमारियों के इलाज के लिए विकसित की जा रही दवा एटावोपिवैट (Etavopivat) के फेज-3 क्लिनिकल ट्रायल का दायरा बढ़ाते हुए इसमें 6 से 12 वर्ष तक के बच्चों को भी शामिल करने की सिफारिश की गई है।
विशेषज्ञ समितियों द्वारा क्लिनिकल ट्रायल और विनिर्माण को दी गई यह मंजूरी देश में पेट और लिवर से जुड़ी गंभीर व पुरानी बीमारियों के इलाज में अधिक प्रभावी और सुरक्षित दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करेगी।
Share.

About Us

CG NOW एक भरोसेमंद और निष्पक्ष न्यूज़ प्लेटफॉर्म है, जो आपको छत्तीसगढ़, भारत और दुनिया भर की ताज़ा, सटीक और तथ्य-आधारित खबरें प्रदान करता है। हमारी प्राथमिकता है जनता तक सही और निष्पक्ष जानकारी पहुँचाना, ताकि वे हर पहलू से जागरूक और अपडेटेड रहें।

Contact Us

Syed Sameer Irfan
📞 Phone: 94255 20244
📧 Email: sameerirfan2009@gmail.com
📍 Office Address: 88A, Street 5 Vivekanand Nagar, Bhilai 490023
📧 Email Address: cgnow.in@gmail.com
📞 Phone Number: 94255 20244

© 2025 cgnow.in. Designed by Nimble Technology.

error: Content is protected !!
Exit mobile version