छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में जूनियर डॉक्टरों का आंदोलन पांचवें दिन भी पूरी मजबूती के साथ जारी है, जिससे अंबेडकर अस्पताल और मेडिकल कॉलेज से जुड़ी स्वास्थ्य सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हुई हैं। राज्य शासन द्वारा एमबीबीएस इंटर्न का मानदेय बढ़ाकर 25,000 रुपये प्रतिमाह करने और पीजी मेडिकल डॉक्टरों के स्टाइपेंड में लगभग 26 प्रतिशत तक की वृद्धि (जिसके तहत प्रथम वर्ष का स्टाइपेंड 85,050 रुपये, द्वितीय वर्ष का 90,027 रुपये और तृतीय वर्ष का 93,996 रुपये किया गया है और जो 1 अक्टूबर से लागू होगा) का आदेश जारी किए जाने के बावजूद डॉक्टरों ने हड़ताल खत्म करने से इंकार कर दिया है।
जूनियर डॉक्टरों का कहना है कि उनकी मुख्य नाराजगी केवल स्टाइपेंड को लेकर नहीं है, बल्कि उनकी 17 सूत्रीय मांगें लंबे समय से लंबित हैं। इस आंदोलन का सबसे बड़ा कारण एमबीबीएस और पीजी के बाद लागू होने वाली अनिवार्य बांड व्यवस्था है। वर्तमान नियमों के तहत डॉक्टरों को दो-दो साल की बांड सेवा देनी होती है और इसका उल्लंघन करने पर भारी-भरकम राशि—पीजी के लिए 50 लाख और एमबीबीएस के लिए 25 लाख रुपये—का प्रावधान है, जिसे घटाने या पूरी तरह समाप्त करने की मांग की जा रही है। इसके अलावा, राज्य में विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता बढ़ाने के लिए ‘सुपर स्पेशियलिटी कैडर’ बनाने, पोस्ट-पीजी स्टाइपेंड और सीनियर रेजिडेंट के मानदेय में संशोधन तथा डीएम एवं एमसीएच सुपर स्पेशियलिटी रेजिडेंट के स्टाइपेंड में बदलाव जैसी अहम मांगें भी इसमें शामिल हैं।
हड़ताल के कारण अस्पतालों की ओपीडी में मरीजों की संख्या सामान्य दिनों की तुलना में घटकर आधी रह गई है, जिससे आम जनता को इलाज के लिए भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए आज स्वास्थ्य मंत्री के साथ जूनियर डॉक्टरों की एक अहम बैठक होने वाली है। यदि इस बैठक में कोई सकारात्मक और संतोषजनक समाधान नहीं निकलता है, तो डॉक्टरों ने आपातकालीन (इमरजेंसी) सेवाओं का भी पूर्ण बहिष्कार करने की चेतावनी दी है, जिससे आने वाले दिनों में स्वास्थ्य व्यवस्था पर और अधिक दबाव बढ़ सकता है।



