प्रकृति की गोद जशपुर और सरगुजा में जनजातीय आस्था का महापर्व सरहुल

नई दिल्ली/वाराणसी | 28 फरवरी, 2026

हिंदू धर्म और ज्योतिष शास्त्र में आस्था रखने वालों के लिए एक महत्वपूर्ण सूचना है। यदि आप मार्च के महीने में विवाह, गृह प्रवेश या मुंडन जैसे मांगलिक कार्यों की योजना बना रहे हैं, तो अपनी तारीखों पर एक बार फिर विचार कर लें। आगामी 14 मार्च 2026 की शाम से देश भर में मांगलिक कार्यों पर पूर्णतः विराम लगने जा रहा है। इसका कारण है सूर्य देव का राशि परिवर्तन और ‘खरमास’ का आगाज़।

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मीन संक्रांति और खरमास का खगोलीय संयोग

ज्योतिषीय गणना के अनुसार, 14 मार्च की शाम को सूर्य देव कुंभ राशि का त्याग कर अपने गुरु बृहस्पति की राशि ‘मीन’ में प्रवेश करेंगे। खगोल विज्ञान और ज्योतिष में इस घटना को ‘मीन संक्रांति’ कहा जाता है। जैसे ही सूर्य मीन राशि में कदम रखेंगे, वैसे ही ‘खरमास’ (जिसे स्थानीय भाषा में मलमास भी कहा जाता है) का प्रारंभ हो जाएगा। पंचांग के अनुसार, यह काल शुभ कार्यों के लिए वर्जित माना गया है, जो अगले एक महीने यानी 14 अप्रैल 2026 (मेष संक्रांति) तक प्रभावी रहेगा।

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क्यों वर्जित हैं मांगलिक कार्य?

पौराणिक मान्यताओं और धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, जब भी सूर्य देव अपने गुरु बृहस्पति की राशियों (धनु या मीन) में प्रवेश करते हैं, तो वे अपने गुरु की सेवा में लग जाते हैं। इस दौरान सूर्य का तेज और उनकी शुभता कुछ कम हो जाती है। चूंकि हिंदू धर्म में सूर्य को सभी कार्यों का साक्षी और ऊर्जा का मुख्य स्रोत माना गया है, इसलिए उनकी कमजोर स्थिति में किए गए कार्य सफल या फलदायी नहीं माने जाते।

इसी कारणवश, खरमास की इस एक महीने की अवधि में निम्नलिखित कार्यों पर रोक रहती है ,वर-वधू के सुखद भविष्य के लिए इस दौरान फेरे नहीं लिए जाते। नए घर में प्रवेश या नींव पूजन को अशुभ माना जाता है। बच्चों के मुंडन या कान छेदन जैसे संस्कार टाल दिए जाते हैं। बड़े निवेश या नए व्यापारिक प्रतिष्ठान का शुभारंभ इस समय नहीं किया जाता।

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आध्यात्मिक दृष्टि से विशेष है यह समय

भले ही खरमास में सांसारिक मांगलिक कार्य वर्जित हों, लेकिन आध्यात्मिक दृष्टि से इस महीने का बहुत महत्व है। विद्वानों का मानना है कि यह समय दान, पुण्य, जप और तप के लिए सर्वश्रेष्ठ है। इस महीने में पवित्र नदियों में स्नान करने और सूर्य देव की उपासना करने से विशेष पुण्य फल की प्राप्ति होती है। विशेष रूप से ‘विष्णु सहस्त्रनाम’ का पाठ और गौ सेवा इस माह में अत्यंत फलदायी मानी गई है।

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बाजारों पर असर और अप्रैल का इंतजार

खरमास के कारण वेडिंग इंडस्ट्री, कैटरर्स और आभूषण विक्रेताओं के काम में थोड़ी सुस्ती आने की संभावना है। हालांकि, यह समय उन लोगों के लिए तैयारियों का है जिनके घरों में अप्रैल के उत्तरार्ध में विवाह होने वाले हैं। व्यापारियों का मानना है कि 14 अप्रैल को जैसे ही सूर्य मेष राशि में प्रवेश करेंगे और खरमास समाप्त होगा, वैसे ही बाजारों में एक बार फिर रौनक लौट आएगी। यदि आपको कोई अत्यंत आवश्यक कार्य करना है, तो उसे 14 मार्च की दोपहर से पहले संपन्न कर लें, अन्यथा आपको सीधे अप्रैल के मध्य तक प्रतीक्षा करनी होगी।

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