बिलासपुर, 8 सितंबर 2026: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने पंचायत चुनावों में आयु के प्रमाण को लेकर एक अहम और स्पष्ट फैसला सुनाया है। अदालत ने साफ किया है कि आधार कार्ड और वोटर आईडी कार्ड में दर्ज जन्मतिथि को उम्र का अंतिम या पुख्ता प्रमाण नहीं माना जा सकता। उम्र की सही पुष्टि के लिए शैक्षिक रिकॉर्ड और 10वीं की मार्कशीट को ही सबसे अधिक भरोसेमंद और वैध माना जाएगा।
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने बलरामपुर जिले की कृष्णानगर ग्राम पंचायत की सरपंच जसिला तिथियो का चुनाव खारिज कर दिया है। संविधान के अनुच्छेद 243-F के तहत पंचायत चुनाव लड़ने के लिए न्यूनतम आयु 21 वर्ष पूरी होना अनिवार्य है।कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जन्मतिथि के निर्धारण के लिए मान्यता प्राप्त बोर्ड का मैट्रिक सर्टिफिकेट और आधिकारिक स्कूल रिकॉर्ड ही सर्वोपरि हैं। हाईकोर्ट ने निचली अदालत (इलेक्शन ट्रिब्यूनल) के आदेश को सही ठहराते हुए याचिका खारिज कर दी है।
क्या है पूरा मामला?
यह पूरा मामला बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के जनपद पंचायत बलरामपुर अंतर्गत ग्राम पंचायत कृष्णानगर का है। यहां 22 फरवरी 2025 को हुए मतदान में जसिला तिथियो (पति रंजीत दास) को सरपंच पद के लिए सबसे अधिक वैध वोट मिले थे, और रिटर्निंग ऑफिसर ने उनका नॉमिनेशन स्वीकार कर लिया था।
इसके खिलाफ दूसरी उम्मीदवार सूरजपती राम ने इलेक्शन पिटीशन दायर की थी। याचिका में आरोप लगाया गया कि जसिला की पहली कक्षा से लेकर मैट्रिक तक के सभी शैक्षिक दस्तावेजों में जन्मतिथि 12 अप्रैल 2004 दर्ज है। इस हिसाब से नामांकन दाखिल करते समय उनकी उम्र 21 वर्ष पूरी नहीं हुई थी, बल्कि वह करीब 19 वर्ष की थीं। इलेक्शन ट्रिब्यूनल ने 25 सितंबर 2025 को इस याचिका को स्वीकार करते हुए उनका निर्वाचन शून्य घोषित कर दिया था, जिसके खिलाफ जसिला ने हाईकोर्ट में अपील की थी।
हाईकोर्ट की अहम टिप्पणी
हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान जसिला की ओर से जुलाई 2025 में अपडेट कराया गया एक नया जन्म प्रमाण पत्र पेश किया गया, जिसमें जन्मतिथि 12 अप्रैल 2002 दर्ज थी। हालांकि, अदालत ने इसे खारिज कर दिया क्योंकि यह दस्तावेज चुनाव याचिका दायर होने के पश्चात जारी किया गया था।
मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद ने फैसला सुनाया कि जन्मतिथि तय करने के लिए जन्म प्रमाण पत्र (समय पर जारी), मान्यता प्राप्त बोर्ड का मैट्रिक सर्टिफिकेट और स्कूल रिकॉर्ड ही मान्य व महत्वपूर्ण हैं। आधार या वोटर आईडी से उम्र का निर्धारण नहीं किया जा सकता। इसी आधार पर कोर्ट ने ट्रिब्यूनल के आदेश को बरकरार रखा है।


