‘एक दिन वैज्ञानिक के नाम’: राष्ट्रव्यापी कार्यक्रम ‘SHINE 2026’ आज से शुरू: अब स्कूली छात्र खुद जाकर देखेंगे ICMR की सीक्रेट लैब्स! देश के 30,000 छात्र , 83 केंद्रों में 9वीं से 12वीं के छात्र सीखेंगे शोध और सार्वजनिक स्वास्थ्य के गुर

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने मुस्लिम कानून के तहत संपत्ति के उपहार (हिबा) से जुड़े एक अत्यंत महत्वपूर्ण मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने स्पष्ट किया है कि केवल गिफ्ट डीड (उपहार विलेख) का पंजीयन हो जाने भर से ‘हिबा’ वैध नहीं माना जा सकता। इसके लिए दानकर्ता की घोषणा, प्राप्तकर्ता की स्वीकृति के साथ-साथ संपत्ति के वास्तविक कब्जे की प्रभावी सुपुर्दगी आवश्यक है।
अदालत ने रायपुर के 11वें जिला न्यायाधीश के उस फैसले और डिक्री को बरकरार रखा, जिसमें ससुर द्वारा बहू और पोते-पोतियों के हक को दरकिनार कर अपनी पत्नी और बेटियों के पक्ष में निष्पादित गिफ्ट डीड को शून्य घोषित किया गया था।

छत्तीसगढ़ के नगरीय निकायों में ‘पति/परिजन संस्कृति’ पर लगाम, सरकार ने प्रतिनिधि बनाने पर लगाई रोक

क्या है पूरा मामला?

विवाद रायपुर के खनिज नगर (पुरैना-तेलीबांधा) स्थित 1,500 वर्गफुट के प्लॉट नंबर 46 से जुड़ा है:
  • पारिवारिक पृष्ठभूमि: स्वर्गीय नौशाद अली की पत्नी नसीमा अली और उनके दो बच्चों ने संपत्ति में अपने अधिकार की सुरक्षा के लिए मुकदमा दायर किया था। नसीमा के पति नौशाद की वर्ष 2018 में मृत्यु हो गई थी।
  • कब्जे का दावा: नसीमा का कहना था कि विवाह के बाद वर्ष 2005 से ही वह अपने पति द्वारा निर्मित 370 वर्गफुट के मकान में रह रही थीं।
  • विवादित गिफ्ट डीड: पति की मृत्यु के बाद ससुर रजब अली ने 27 मार्च 2019 को पूरी 1,500 वर्गफुट की संपत्ति का पंजीकृत गिफ्ट डीड अपनी पत्नी और बेटियों के नाम कर दिया तथा बहू व बच्चों को बेदखल करने का प्रयास किया।

छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट का बड़ा फैसला: ‘विभागीय गलती से हुआ अतिरिक्त भुगतान सरकारी धन, वसूली से छूट केवल असाधारण परिस्थितियों में संभव’

उच्च न्यायालय ने मुस्लिम पर्सनल लॉ के तहत वैध ‘हिबा’ के तीन अनिवार्य स्तंभों पर जोर दिया:
  1. दानकर्ता की स्पष्ट घोषणा (Declaration)
  2. प्राप्तकर्ता द्वारा स्वीकृति (Acceptance)
  3. कब्जे की वास्तविक सुपुर्दगी (Delivery of Possession)
कोर्ट ने पाया कि यद्यपि दस्तावेज में कब्जा सौंपने की बात दर्ज थी, लेकिन वास्तव में वादी पक्ष (बहू व बच्चे) 370 वर्गफुट हिस्से पर लगातार काबिज थे। प्रतिवादी यह सिद्ध नहीं कर सके कि पूरी संपत्ति का वास्तविक और प्रभावी कब्जा उपहार प्राप्तकर्ताओं को हस्तांतरित कर दिया गया था।
  • ‘मुशा’ का सिद्धांत और संयुक्त उपहार: कोर्ट ने यह भी नोट किया कि गिफ्ट डीड चार लोगों के पक्ष में संयुक्त रूप से की गई थी, जिसमें किसी का हिस्सा निर्धारित नहीं था।
  • अवैध बेदखली पर रोक: अदालत ने कहा कि लंबे समय से संपत्ति पर शांतिपूर्ण ढंग से रह रहे किसी व्यक्ति को केवल किसी विवादित दस्तावेज के आधार पर जबरन बेदखल नहीं किया जा सकता।

दिव्यांगजन छात्रवृत्ति योजना के लिए 30 सितंबर तक ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित

अदालत का अंतिम निर्णय

हाई कोर्ट ने रायपुर जिला अदालत के 2025 के फैसले में हस्तक्षेप करने से इनकार करते हुए प्रतिवादियों की प्रथम अपील खारिज कर दी। अदालत ने 27 मार्च 2019 के पंजीकृत उपहार विलेख को निरस्त (शून्य) रखते हुए बहू और बच्चों के शांतिपूर्ण कब्जे में हस्तक्षेप पर लगाई गई स्थायी रोक (Permanent Injunction) को बरकरार रखा।
Share.

About Us

CG NOW एक भरोसेमंद और निष्पक्ष न्यूज़ प्लेटफॉर्म है, जो आपको छत्तीसगढ़, भारत और दुनिया भर की ताज़ा, सटीक और तथ्य-आधारित खबरें प्रदान करता है। हमारी प्राथमिकता है जनता तक सही और निष्पक्ष जानकारी पहुँचाना, ताकि वे हर पहलू से जागरूक और अपडेटेड रहें।

Contact Us

Syed Sameer Irfan
📞 Phone: 94255 20244
📧 Email: sameerirfan2009@gmail.com
📍 Office Address: 88A, Street 5 Vivekanand Nagar, Bhilai 490023
📧 Email Address: cgnow.in@gmail.com
📞 Phone Number: 94255 20244

© 2025 cgnow.in. Designed by Nimble Technology.

error: Content is protected !!
Exit mobile version