छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग और मध्य क्षेत्र में बीते 48 घंटों से जारी मूसलाधार बारिश ने जनजीवन को पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है। लगातार बारिश और बैकवॉटर के चलते जगदलपुर-रायपुर राष्ट्रीय राजमार्ग पर सोनारपाल के पास सड़क लबालब डूब गई है, जिससे हाईवे पर यातायात पूरी तरह ठप हो गया है और दोनों ओर 2 से 3 किलोमीटर लंबी वाहनों की कतारें लग गई हैं। मौके पर स्थिति संभालने के लिए एसडीआरएफ (SDRF) की टीम तैनात की गई है। इसके साथ ही चक्रवाती तंत्र के प्रभाव को देखते हुए रेलवे प्रशासन ने किरंदुल-विशाखापट्टनम और बस्तर रूट की कई प्रमुख ट्रेनों को रद्द या शॉर्ट-टर्मिनेट कर दिया है।
सुकमा जिले में हालात बेहद गंभीर बने हुए हैं। छिंदगढ़ क्षेत्र के ओलेर गांव में पानी भरने से चारों तरफ से घिरे इलाके में 70 से 80 ग्रामीणों के फंसे होने की खबर है, जिन्हें सुरक्षित निकालने के लिए नगर सेना की रेस्क्यू टीम रवाना की गई है। भारी बारिश से जिले के सैकड़ों गांव प्रभावित हैं। सुकमा पुलिस ने ट्रैफिक एडवाइजरी जारी करते हुए बताया कि सुकमा-मलकानगिरि मार्ग (झापरा पुल), सुकमा-दोरनापाल मार्ग (डब्बा-टोटा पुलिया) और दोरनापाल-कोंटा मार्ग (इंजराम पुलिया) के ऊपर से पानी बहने के कारण ये सभी प्रमुख मार्ग बंद कर दिए गए हैं। सुकमा नगर की कन्या शाला में तत्काल राहत शिविर स्थापित कर भोजन और ठहरने की व्यवस्था की गई है। कलेक्टर अमित कुमार और एसपी मयंक गुर्जर हालात की सीधी मॉनिटरिंग कर रहे हैं, वहीं सांसद महेश कश्यप ने सभी जिला कलेक्टरों से फोन पर समन्वय बनाकर राहत कार्य तेज करने के निर्देश दिए हैं।
कांकेर जिले के अंतागढ़ क्षेत्र में पिछले 48 घंटों की भारी वर्षा से दूरसंचार और इंटरनेट सेवाएं पूरी तरह ठप हो गई हैं। चारगांव-मेटाबोदेली पुल के डूबने से कई गांवों का संपर्क अंतागढ़ ब्लॉक मुख्यालय से कट चुका है। वहीं अंतागढ़-नारायणपुर निर्माणाधीन मार्ग पर कीचड़ और गड्ढों के कारण आवागमन बेहद जोखिमपूर्ण हो गया है। बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कांकेर जिला प्रशासन ने स्कूलों में अवकाश घोषित कर दिया है और लोगों को उफनते नदी-नालों को पार न करने की हिदायत दी गई है।
दूसरी ओर, कैचमेंट एरिया में भारी बारिश के चलते धमतरी जिले का जीवनदायिनी गंगरेल बांध (पंडित रविशंकर शुक्ल जलाशय) अपनी कुल 32 टीएमसी क्षमता के साथ 100 फीसदी भर गया है। बांध की सुरक्षा और जल प्रबंधन को देखते हुए इसके सभी 14 रेडियल गेट खोल दिए गए हैं, जिनसे महानदी में कुल 2 लाख 6 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है। जिले के अन्य प्रमुख बांध—मुरुमसिल्ली, दुधावा और सोंढूर भी लबालब हो चुके हैं। महानदी का जलस्तर तेजी से बढ़ने की आशंका के चलते प्रशासन ने तटवर्ती और निचले गांवों में हाई अलर्ट जारी कर दिया है तथा राजस्व व पुलिस अमले को 24 घंटे निगरानी रखने के निर्देश दिए हैं।

