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नई दिल्ली/रायपुर/CG Now:

देश की स्कूली शिक्षा व्यवस्था में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) के तहत एक ऐतिहासिक बदलाव होने जा रहा है। एनसीईआरटी (NCERT) ने स्पष्ट किया है कि कक्षा 9वीं से लेकर 11वीं तक के पाठ्यक्रम को चरणबद्ध तरीके से बदला जाएगा। इस नए बदलाव का सबसे बड़ा असर आगामी सत्रों में दिखने वाला है, जहाँ शिक्षा को किताबी ज्ञान से हटाकर अधिक व्यावहारिक और छात्र-केंद्रित बनाने पर जोर दिया गया है।

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कक्षा 9वीं के लिए 2026-27 से नया सफर:

एनसीईआरटी के अनुसार, कक्षा 9वीं के छात्रों के लिए नया सिलेबस सत्र 2026-27 से पूरी तरह लागू कर दिया जाएगा। विभाग ने इसका ड्राफ्ट (Draft) भी जारी कर दिया है और वर्तमान में शिक्षकों व विशेषज्ञों से इस पर सुझाव मांगे जा रहे हैं। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि छात्र अपनी पढ़ाई को वास्तविक जीवन की समस्याओं से जोड़ सकें।

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10वीं और 11वीं के छात्रों को अभी करना होगा इंतजार:

कक्षा 10वीं और 11वीं के छात्रों के लिए राहत और जानकारी भरी खबर यह है कि उनके लिए नई किताबें सत्र 2027-28 से प्रभावी होंगी। यानी आगामी सत्र 2026-27 में इन कक्षाओं के विद्यार्थी पुरानी किताबों से ही अपनी पढ़ाई जारी रखेंगे। बोर्ड परीक्षाओं और उच्च शिक्षा की तैयारी को ध्यान में रखते हुए एनसीईआरटी इन कक्षाओं के लिए बदलावों को बहुत ही सावधानी और चरणबद्ध तरीके से लागू कर रहा है।

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कक्षा 1 से 8 तक की तैयारी पूरी:

प्राइमरी और मिडिल स्कूलों (कक्षा 1 से 8) के लिए नई किताबें राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा (NCF) 2023 के आधार पर पहले ही तैयार की जा चुकी हैं। ये किताबें न केवल प्रिंटेड रूप में बल्कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भी उपलब्ध कराई गई हैं, ताकि तकनीक के माध्यम से छात्र आसानी से सीख सकें।

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शिक्षकों और स्कूलों के लिए अपील:

एनसीईआरटी ने देशभर के स्कूलों और शिक्षकों से अपील की है कि वे इस बड़े बदलाव के अनुरूप खुद को तैयार करना शुरू कर दें। नई किताबों का मुख्य फोकस ‘व्यावहारिक शिक्षा’ पर होगा, जिससे रट्टा मारने की प्रवृत्ति कम होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह बदलाव भारतीय छात्रों को वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करने में मील का पत्थर साबित होगा।

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छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में, जहाँ एनसीईआरटी के सिलेबस को आधार बनाया जाता है, वहां के लाखों छात्रों और शिक्षकों के लिए यह जानकारी बहुत महत्वपूर्ण है। विशेष रूप से कक्षा 9वीं के छात्रों को अब नए सत्र में बदले हुए पैटर्न के लिए मानसिक रूप से तैयार रहना होगा।

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