नई दिल्ली, 06 जून 2026

देश के करोड़ों राशन उपभोक्ताओं को राहत देने और बाजार में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। उपभोक्ता मामले विभाग ने विधिक माप ढांचे के तहत खाद्य तेलों और वसा की शुद्ध मात्रा तथा मानक पैक आकार (स्टैंडर्ड पैक साइज) निर्धारित करने के लिए अपनी पुरानी नियमावली में बड़ा संशोधन कर दिया है। सरकार के इस फैसले के बाद अब कंपनियां अपनी मनमर्जी के आकारों में तेल नहीं बेच सकेंगी, जिससे ग्राहकों के लिए अलग-अलग ब्रांड्स के तेल की कीमतों की तुलना करना बहुत आसान हो जाएगा।

यह फैसला देश के खाद्य तेल क्षेत्र के लगभग 90 प्रतिशत हिस्से का प्रतिनिधित्व करने वाले प्रमुख उद्योग संघों के साथ व्यापक विचार-विमर्श के बाद लिया गया है। दरअसल, बाजार में अलग-अलग साइज के पैकेटों की बढ़ती संख्या के कारण उपभोक्ताओं के लिए सही कीमत का आकलन करना और सोच-समझकर खरीदारी करना काफी मुश्किल हो रहा था। इसी भ्रम को दूर करने के लिए अब पाम ऑयल, सोयाबीन, सूरजमुखी, सरसों, मूंगफली, तिल, राइस ब्रान, कॉटन सीड और मक्के के तेल सहित सभी मिश्रित खाद्य तेलों के लिए पैकेट के आकार निश्चित कर दिए गए हैं।

नए नियमों के अनुसार अब कंपनियां सिर्फ निर्धारित मात्रा में ही अपने उत्पाद पैक कर सकेंगी। छोटे और मध्यम खरीदारों के लिए 200 मिलीलीटर या ग्राम, 500 मिलीलीटर या ग्राम, 1 लीटर या किलोग्राम, 2 लीटर या किलोग्राम तथा 3 लीटर या किलोग्राम के साइज तय किए गए हैं। वहीं बड़े और कमर्शियल इस्तेमाल के लिए 4 लीटर, 5 लीटर, 15 लीटर और 20 लीटर या किलोग्राम के आकार निर्धारित हुए हैं। हालांकि, गरीब और निम्न-मध्यम वर्ग की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए 200 मिलीलीटर या 200 ग्राम से कम के छोटे पाउच को इस मानकीकरण से बाहर रखा गया है ताकि बाजार में किफायती छोटे पैक पहले की तरह मिलते रहें।

उपभोक्ताओं को किसी भी तरह के भ्रम से बचाने के लिए सरकार ने एक और सख्त नियम जोड़ा है। अब अगर तेल के पैकेट पर उसकी मात्रा लीटर या मिलीलीटर में लिखी है, तो विधिक माप नियम 2011 के तहत उस पर उसके बराबर का वजन किलोग्राम या ग्राम में भी साफ-साफ लिखना अनिवार्य होगा। इससे ग्राहकों को यह सटीक जानकारी मिल सकेगी कि वे पैसे के बदले कितनी वास्तविक मात्रा खरीद रहे हैं। यह नियम भारत में बनने वाले तेल के साथ-साथ विदेशों से आयात होने वाले खाद्य तेलों पर भी समान रूप से लागू होगा।

तेल निर्माताओं, पैकरों और आयातकों को इन नए नियमों को पूरी तरह से अपने सिस्टम में लागू करने के लिए तीन महीने का समय दिया गया है, हालांकि जो कंपनियां इसे तुरंत अपनाना चाहती हैं, वे आज से ही इसकी शुरुआत कर सकती हैं। इस सुधार से जहां आम उपभोक्ताओं को पारदर्शी और सही निर्णय लेने में मदद मिलेगी, वहीं पैकेजिंग प्रक्रियाओं में एकरूपता आने से खाद्य तेल उद्योग में भी स्वस्थ प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और बाजार अधिक निष्पक्ष बनेगा।

इस विषय से जुड़ी आधिकारिक जानकारी और दिशा-निर्देशों के लिए उपभोक्ता मामले विभाग की आधिकारिक वेबसाइट (consumeraffairs.nic.in) या प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो (pib.gov.in) की मूल विज्ञप्ति को देखा जा सकता है। इसके अलावा किसी भी प्रकार की शिकायत या सुझाव के लिए उपभोक्ता राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन (consumerhelpline.gov.in) की मदद ले सकते हैं।

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