नई दिल्ली:
संसद में जारी भारी हंगामे और शोर-शराबे के बीच लोकसभा ने जन्म-मृत्यु पंजीकरण संशोधन विधेयक को ध्वनिमत से अपनी मंजूरी दे दी है। सदन में बिना किसी चर्चा या बहस के यह महत्वपूर्ण विधेयक महज तीन मिनट के भीतर पारित हो गया। इसके पारित होते ही सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच संसदीय परंपराओं की अनदेखी को लेकर आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज़ी से शुरू हो गया है।
क्या हैं इस नए विधेयक के मुख्य प्रावधान?
जन्म और मृत्यु पंजीकरण के नियमों में किए गए इस संशोधन के बाद अब दो साल से अधिक समय बीत जाने पर जन्म या मृत्यु का पंजीकरण कराने की प्रक्रिया को बेहद सख्त बना दिया गया है।
न्यायिक मजिस्ट्रेट का आदेश अनिवार्य
नए नियम के लागू होने के बाद यदि जन्म या मृत्यु के दो साल या उससे अधिक समय बाद पंजीकरण कराया जाता है, तो इसके लिए प्रथम श्रेणी के न्यायिक मजिस्ट्रेट (First Class Judicial Magistrate) का आदेश प्राप्त करना कानूनी रूप से अनिवार्य होगा।
पुराना नियम क्या था
इससे पहले के कानून में यदि पंजीकरण कराने में एक साल से अधिक की देरी होती थी, तो केवल जिला मजिस्ट्रेट (DM), उप विभागीय मजिस्ट्रेट (SDM) या किसी अधिकृत कार्यकारी मजिस्ट्रेट के आदेश से काम चल जाता था। अब इस व्यवस्था में बदलाव कर न्यायिक हस्तक्षेप को अनिवार्य बनाया गया है।
बिना चर्चा के पास हुआ विधेयक, सुप्रीम कोर्ट की चिंता दरकिनार
गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय द्वारा विधेयक पेश किए जाने के बाद आसन पर मौजूद दिलीप सैकिया ने सदस्यों को चर्चा के लिए आमंत्रित किया, लेकिन हंगामे के चलते किसी भी सदस्य ने बहस में भाग नहीं लिया। नतीजतन, तीन मिनट में बिल पास हो गया।
उल्लेखनीय है कि उच्चतम न्यायालय पहले ही बिना सार्थक चर्चा के कानून पारित करने की प्रवृत्ति पर गहरी चिंता जता चुका है। पूर्व मुख्य न्यायाधीश एन.वी. रमन्ना ने टिप्पणी की थी कि बिना बहस के कानून बनने से उनमें खामियां रह जाती हैं, जिससे आम लोगों को अदालतों का रुख करना पड़ता है और न्यायपालिका पर मुकदमों का बोझ बढ़ता है।
संसद में घमासान जारी: नियम 267 पर ठनी
दूसरी ओर, राज्यसभा में भी गतिरोध थमने का नाम नहीं ले रहा है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे द्वारा नियम 267 के तहत दिए गए नोटिस को सभापति द्वारा अस्वीकार किए जाने के बाद सदन में हंगामा बढ़ गया। केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू का आरोप है कि विपक्ष कार्य मंत्रणा समिति में सहमति जताने के बाद सदन में हंगामा करता है, जबकि सपा सांसद धर्मेंद्र यादव का कहना है कि सरकार ने बिना चर्चा के विधेयक पारित कराने की आदत बना ली है।


