त्योहारी मौसम शुरू होने से पहले ही आम उपभोक्ताओं और हलवाइयों को महंगाई का बड़ा झटका लगा है। खुदरा बाजार में चीनी की कीमतें पहली बार 65 रुपये प्रति किलो के स्तर तक पहुंच गई हैं। व्यापारियों के अनुसार, पिछले 15 दिनों के भीतर चीनी के दामों में करीब 15 रुपये प्रति किलो का तेज उछाल आया है। 15 दिन पहले 48 से 50 रुपये प्रति किलो बिकने वाली चीनी अब इतिहास में पहली बार 60 रुपये का आंकड़ा पार कर गई है।
उत्पादन में गिरावट और एथेनॉल निर्माण का असर
दामों में इस अप्रत्याशित वृद्धि की मुख्य वजह मांग के मुकाबले आपूर्ति का आधा रह जाना है। इस वर्ष चीनी का कुल उत्पादन पिछले साल की तुलना में करीब 5 फीसदी कम दर्ज किया गया है। इसके अलावा, चीनी मिलों द्वारा अधिक मुनाफे के लिए गन्ने के रस से चीनी बनाने के बजाय एथेनॉल उत्पादन को प्राथमिकता दी गई। पेट्रोल और शराब कंपनियों की ओर से एथेनॉल की भारी मांग होने के कारण चीनी का घरेलू भंडार सीजन के अंतिम दौर में काफी घट गया है, जबकि नया पेराई सत्र अक्टूबर-नवंबर में शुरू होगा।
मिठाई उद्योग पर गहराया संकट
रक्षाबंधन, श्रीकृष्ण जन्माष्टमी, गणेशोत्सव और दिवाली जैसे त्योहारों के चलते बिस्कुट, कन्फेक्शनरी और मिठाई उद्योग में चीनी की मांग में भारी इजाफा हुआ है। यूपी आदर्श व्यापार मंडल के अनुसार, मिठाई निर्माण में औसतन 20 फीसदी चीनी का इस्तेमाल होता है, लेकिन बाजार में मांग की तुलना में मात्र आधी आपूर्ति ही मिल पा रही है। कच्चे माल की लागत 25 से 30 फीसदी तक बढ़ने से व्यावसायिक सिलिंडर पर मिली 375 रुपये की राहत भी बेअसर साबित हो रही है, जिससे मिठाई कारोबारियों का मुनाफा बुरी तरह प्रभावित हो रहा है।
जमाखोरी पर लगाम: सरकार ने तय की 15 दिनों की स्टॉक सीमा
बाजार में बढ़ती सट्टेबाजी, कालाबाजारी और कृत्रिम संकट को रोकने के लिए भारत सरकार के उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय ने सख्त कदम उठाया है। नई अधिसूचना के अनुसार, 10 मीट्रिक टन से अधिक मासिक खपत वाले डीलरों और थोक उपभोक्ताओं के लिए अधिकतम 15 दिनों की स्टॉक सीमा तय कर दी गई है। यह आदेश 1 सितंबर से 30 नवंबर तक पूरे देश में प्रभावी रहेगा ताकि त्योहारी मांग के दौरान बाजार में पर्याप्त आपूर्ति बनी रहे और कीमतों को नियंत्रित किया जा सके।



