रायपुर:
छत्तीसगढ़ में अब अपने घर के पास ही स्कूल, अस्पताल या निजी दफ्तर खोलना आसान हो जाएगा। राज्य सरकार ने उद्योगों को बढ़ावा देने, निवेश आकर्षित करने और आम जनता को सहूलियत देने के लिए ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ के तहत ऐतिहासिक नीतिगत फैसला लिया है। सरकार ने चार दशक पुराने ‘छत्तीसगढ़ भूमि विकास नियम, 1984’ में व्यापक संशोधन करते हुए केंद्र सरकार की सिफारिशों के अनुरूप ‘नेगेटिव लिस्ट मॉडल’ (Negative List Model) लागू कर दिया है।
वित्त, आवास एवं पर्यावरण मंत्री ओ.पी. चौधरी की पहल पर किए गए इस बदलाव का सबसे बड़ा असर आम शहरी जीवन और रियल एस्टेट सेक्टर पर पड़ेगा। अब आवासीय क्षेत्रों में जरूरी नागरिक सुविधाओं और औद्योगिक इलाकों में कामगारों के लिए आवास की राह पूरी तरह खुल गई है।

क्या है ‘नेगेटिव लिस्ट’ मॉडल और कैसे खत्म होगी अफसरशाही?

पहले किसी भी जमीन पर नया काम शुरू करने के लिए सरकारी दफ्तरों से लंबी अनुमतियां और एनओसी (NOC) लेनी पड़ती थीं। अब इस व्यवस्था को पूरी तरह उलट दिया गया है:
  • प्रतिबंधित कार्यों की छोटी सूची: सरकार ने हर जोन के लिए केवल उन चुनिंदा गतिविधियों की सूची तय की है, जो वहां पूरी तरह बैन (प्रतिबंधित) रहेंगी।
  • बाकी सब मान्य: उस प्रतिबंध सूची के बाहर की सभी सामाजिक, व्यावसायिक और नागरिक गतिविधियों के संचालन की छूट अपने आप मिल जाएगी।
  • दूसरे राज्यों की तर्ज पर बदलाव: मध्य प्रदेश, राजस्थान और त्रिपुरा के विकास नियंत्रण विनियमों (DCR) की तर्ज पर यह सरलीकरण किया गया है, जिससे फाइलें महीनों तक विभागों में नहीं अटकेंगी।

आम नागरिकों, कर्मचारियों और कारोबारियों को क्या मिलेगा लाभ?

  1. आवासीय इलाकों में जरूरी सुविधाएं: कॉलोनियों और रिहायशी क्षेत्रों में अब अस्पताल, क्लिनिक, स्कूल और ऑफिस खोले जा सकेंगे। इससे लोगों को बच्चों की पढ़ाई और इलाज के लिए दूर के मुख्य बाजारों में नहीं जाना पड़ेगा।
  2. सड़कों पर ट्रैफिक का दबाव होगा कम: घर के पास ही दफ्तर और आवश्यक सेवाएं मिलने से दैनिक आवागमन (कम्यूटिंग) घटेगा, जिससे शहरों में जाम और प्रदूषण की समस्या में कमी आएगी।
  3. औद्योगिक क्षेत्रों में वर्कर हाउसिंग: फैक्ट्रियों और औद्योगिक परिसरों के पास अब हॉस्टल, डॉर्मिटरी और लेबर क्वार्टर बनाने की अनुमति मिल गई है। इससे मजदूरों को कार्यस्थल के पास ही सुरक्षित छत मिलेगी और कंपनियों को समय पर कार्यबल।
  4. मनोरंजन जोन का व्यावहारिक इस्तेमाल: मनोरंजन (Recreational) भूमि उपयोग श्रेणी में अब जरूरत के मुताबिक श्मशान एवं कब्रिस्तान से जुड़ी आवश्यक गतिविधियों की अनुमति दी गई है।

केंद्र से मिले ₹885 करोड़, ‘विकसित छत्तीसगढ़’ का विजन

राज्यों को पूंजीगत निवेश के लिए विशेष सहायता योजना (SASCI) के तहत छत्तीसगढ़ को शहरी नियोजन सुधार लागू करने के लिए केंद्र सरकार से दो वर्षों में कुल 885 करोड़ रुपये की विशेष वित्तीय सहायता प्राप्त हुई है।
राज्य सरकार के अनुसार, नियमों के सरलीकरण और अनुपालन बोझ (Compliance Burden) घटने से राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय निवेशक छत्तीसगढ़ की ओर आकर्षित होंगे, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के हजारों नए अवसर सृजित होंगे।
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