नई दिल्ली: अध्यात्म और आस्था का संगम माना जाने वाला चैत्र नवरात्रि का पावन पर्व इस वर्ष 19 मार्च से शुरू होने जा रहा है। चैत्र शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से नवमी तक चलने वाला यह उत्सव भारतीय संस्कृति में विशेष महत्व रखता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इन नौ दिनों की अवधि में मां दुर्गा स्वयं स्वर्ग लोक से उतरकर पृथ्वी पर अपने भक्तों के बीच विराजमान रहती हैं। हिंदू धर्म में इस समय को आत्मा के जागरण और शक्ति की साधना का सबसे दिव्य काल माना गया है, जो साधक के भीतर की नकारात्मकता को नष्ट कर नई ऊर्जा का संचार करता है।
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ज्योतिष शास्त्र के दृष्टिकोण से इस वर्ष की चैत्र नवरात्रि अत्यंत शुभ मानी जा रही है। 19 मार्च को प्रतिपदा तिथि के अवसर पर कई मंगलकारी संयोग बन रहे हैं, जो पूजा-पाठ और अनुष्ठानों के लिए विशेष फलदायी सिद्ध होंगे। विद्वानों का मत है कि इन शुभ नक्षत्रों में की गई घटस्थापना और मां की आराधना साधक को सुख, समृद्धि और आरोग्य प्रदान करती है। सच्चे मन से किया गया जप और तप इस समय में कई गुना अधिक फल प्रदान करता है, जिससे भक्तों की मनोकामनाएं शीघ्र पूर्ण होती हैं।
शास्त्रों के अनुसार, नवरात्रि की यह पावन अवधि केवल व्रत और उपवास तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आत्म-शुद्धि का एक मार्ग है। इस दौरान भक्त माता के नौ विभिन्न स्वरूपों की विधि-विधान से पूजा करते हैं। ब्रह्म मुहूर्त में स्नान के पश्चात कलश स्थापना के साथ इस अनुष्ठान का आरंभ होता है, जिसमें अखंड ज्योति जलाकर मां का आह्वान किया जाता है।चैत्र नवरात्रि के साथ ही हिंदू नववर्ष यानी नव संवत्सर की भी शुरुआत होती है, जो इसे धार्मिक और सांस्कृतिक दोनों ही रूपों में अत्यंत गौरवशाली बनाता है।

