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नई दिल्ली/रायपुर: हिंदू पंचांग के अनुसार मई का महीना आध्यात्मिक ऊर्जा, व्रत-अनुष्ठान और ग्रह गोचर के लिहाज से विशेष महत्व रखता है। इस महीने में जहां एक ओर भक्त शक्ति, भक्ति और न्याय के देवताओं की उपासना करेंगे, वहीं दूसरी ओर ग्रहों की चाल में होने वाले बदलाव करियर और स्वास्थ्य पर गहरा प्रभाव डालेंगे।
महीने के प्रमुख आकर्षण: बुद्ध पूर्णिमा, शनि जयंती और गंगा दशहरा
मई महीने का आगाज ज्ञान और करुणा के प्रतीक बुद्ध पूर्णिमा से होगा। महीने के मध्य में शनि जयंती का पावन पर्व पड़ेगा, जो कर्म फलदाता शनि देव की कृपा पाने के लिए सबसे उत्तम दिन माना जाता है। इसके साथ ही शक्ति के पुंज हनुमान जी की जयंती और महीने के अंत में मां गंगा के धरती पर अवतरण का पर्व गंगा दशहरा मनाया जाएगा। ज्येष्ठ मास के दौरान पड़ने वाले ‘बड़े मंगल’ (बुढ़वा मंगल) भी इसी महीने की विशेषता रहेंगे।
ज्योतिषीय महत्व और ग्रह गोचर
ज्योतिष विशेषज्ञों के अनुसार, मई में कई बड़े ग्रह अपनी राशि बदलेंगे (गोचर)। इन खगोलीय घटनाओं का सीधा असर मेष से लेकर मीन राशि तक के जातकों के करियर, आर्थिक स्थिति और पारिवारिक जीवन पर पड़ेगा। दान-पुण्य और व्रत के लिए यह समय अत्यंत फलदायी माना गया है।
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मई 2026 की महत्वपूर्ण तिथियाँ
नीचे दी गई सूची के अनुसार आप अपने व्रत और पूजा की योजना बना सकते हैं:
| तिथि | व्रत एवं त्योहार |
| 1 मई | बुद्ध पूर्णिमा, कूर्म जयन्ती, वैशाख पूर्णिमा व्रत, चण्डिका जयन्ती |
| 2 मई | नारद जयंती, ज्येष्ठ माह का आरंभ |
| 5 मई | एकदन्त संकष्टी चतुर्थी, पहला बड़ा मंगल |
| 12 मई | हनुमान जयन्ती, दूसरा बड़ा मंगल |
| 13 मई | अपरा एकादशी, कृष्ण परशुराम द्वादशी |
| 15 मई | वृषभ संक्रान्ति, मासिक शिवरात्रि |
| 16 मई | शनि जयन्ती, वट सावित्री व्रत, दर्श अमावस्या |
| 19 मई | तीसरा बड़ा मंगल |
| 23 मई | अधिक मासिक दुर्गाष्टमी |
| 25 मई | गंगा दशहरा |
| 26 मई | चौथा बड़ा मंगल |
| 27 मई | पद्मिनी एकादशी |
| 31 मई | ज्येष्ठ अधिक पूर्णिमा |
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मई का यह महीना न केवल उपवास और पूजा-पाठ के लिए श्रेष्ठ है, बल्कि यह स्वयं के भीतर शांति और अनुशासन लाने का भी समय है। शनि जयंती पर न्याय के मार्ग पर चलने का संकल्प और बुद्ध पूर्णिमा पर अहिंसा का मार्ग अपनाना इस महीने की आध्यात्मिक सार्थकता को बढ़ाता है।


