भारत में स्मार्टफोन अब महज बातचीत का साधन नहीं, बल्कि पढ़ाई, डिजिटल पेमेंट, बैंकिंग, नौकरी और आजीविका की बुनियादी जरूरत बन चुका है। तकनीक पर बढ़ती इस निर्भरता के बीच स्मार्टफोन की आसमान छूती कीमतों ने आम उपभोक्ताओं, विशेषकर मध्यम और निम्न-मध्यम वर्ग के बजट को बिगाड़ दिया है। महंगे फोन खरीदने के लिए आसान किस्तों (EMI) का सहारा लेना कई परिवारों के लिए गंभीर आर्थिक और मानसिक तनाव की वजह बन रहा है। हाल ही में महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजी नगर में एक युवक और उसके माता-पिता से जुड़ी दुखद घटना और दिल्ली में महंगे फोन की किस्त न चुका पाने के अवसाद में यमुना में कूदने जैसे मामलों ने इस अनियंत्रित कर्ज संस्कृति पर गंभीर बहस छेड़ दी है।
बाजार का विश्लेषण करें तो पिछले कुछ वर्षों में बजट स्मार्टफोन का दायरा काफी सिमट गया है। एक दौर में 10 हजार रुपये के भीतर अच्छे फीचर्स वाले फोन आसानी से उपलब्ध हो जाते थे, जिनकी दो से तीन हजार रुपये की मासिक किस्त आम नागरिक आसानी से चुका देता था। आज स्थिति यह है कि Realme, Oppo, Vivo, Samsung और OnePlus जैसी प्रमुख कंपनियों के हैंडसेट काफी महंगे हो चुके हैं। 10 हजार से कम कीमत वाले बुनियादी बजट फोन बाजार से लगभग गायब हो रहे हैं और ग्राहकों को फीचर्स के नाम पर 20 हजार से 40 हजार रुपये तक के सेगमेंट में धकेला जा रहा है, जिससे उनकी मासिक किस्तें भी भारी-भरकम हो गई हैं।
कंपनियों का कहना है कि स्मार्टफोन महंगे होने का मुख्य कारण मेमोरी चिप्स और अन्य प्रमुख इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स की बढ़ती वैश्विक लागत है। IDC Asia Pacific की रिसर्च रिपोर्ट के मुताबिक, मेमोरी और हार्डवेयर की लागत में तेज उछाल के चलते वर्ष 2026 की दूसरी तिमाही के अंत तक औसत स्मार्टफोन की कीमतों में करीब 15 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की जा चुकी है। यह तेजी यहीं रुकने वाली नहीं है, क्योंकि आगामी महीनों में मोबाइल की कीमतों में 7 से 10 प्रतिशत की और बढ़ोतरी होने का अनुमान लगाया गया है।
कीमतों में इस संभावित उछाल का सीधा असर उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ेगा। सीधे गणित के अनुसार, जो स्मार्टफोन आज 20,000 रुपये में मिल रहा है, वह आगे चलकर लगभग 1,400 से 2,000 रुपये तक और महंगा हो सकता है। इसी तरह 30,000 रुपये वाले मिड-रेंज फोन पर खरीदारों को 2,100 से 3,000 रुपये तक का अतिरिक्त भुगतान करना पड़ेगा। आवश्यक जरूरतों और सोशल स्टेटस के दबाव में जरूरत से ज्यादा महंगे हैंडसेट ईएमआई पर खरीदना उपभोक्ताओं के लिए कर्ज का ऐसा चक्रव्यूह बनता जा रहा है, जो आर्थिक संकट के साथ-साथ गंभीर पारिवारिक तनाव का सबब बन रहा है।

