बिलासपुर: छत्तीसगढ़ में नीट-यूजी (NEET-UG) मेडिकल प्रवेश काउंसलिंग में राज्य कोटे के तहत स्थानीय मूल निवासियों की अलग मेरिट सूची जारी नहीं किए जाने का मामला छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय पहुंच गया है। बिलासपुर निवासी दिनेश पटेल की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने राज्य सरकार को इस मामले में आवश्यक दिशा-निर्देश लेकर स्थिति स्पष्ट करने को कहा है।
डिवीजन बेंच में हुई सुनवाई, सरकार से मांगा स्पष्टीकरण
जस्टिस पार्थ प्रीतम साहू और जस्टिस सुषमा सावंत की खंडपीठ ने याचिका पर सुनवाई की: याचिकाकर्ता के अधिवक्ता राजीव कुमार दुबे ने अदालत को बताया कि अब तक तय नियमों और परंपरा के अनुसार राज्य के मूल निवासी अभ्यर्थियों की एक पृथक (अलग) मेरिट सूची जारी की जाती रही है। इसी अधिकृत सूची के आधार पर राज्य कोटे की सीटों पर नीट-यूजी की काउंसलिंग और दाखिला प्रक्रिया आगे बढ़ती थी, लेकिन इस बार यह अलग सूची प्रकाशित नहीं की गई।याचिका में यह आशंका जताई गई है कि अलग से मूल निवासी सूची जारी न होने से राज्य के स्थानीय और पात्र छात्रों के हितों पर सीधा असर पड़ सकता है।
उप महाधिवक्ता ने मांगा समय, आज फिर सुनवाई
अदालत में शासन की ओर से उप महाधिवक्ता आनंद दादरिया ने पक्ष रखा:
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नियमों के तहत प्रक्रिया का दावा: शासन की ओर से कहा गया कि काउंसलिंग प्रक्रिया पूरी तरह संबंधित नियमों के तहत ही संचालित की जा रही है।
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निर्देश लेने के लिए मांगा वक्त: हालांकि, स्थानीय अभ्यर्थियों की अलग सूची जारी न होने के तकनीकी बिंदु पर संबंधित विभाग से आवश्यक निर्देश लेने के लिए उन्होंने अदालत से एक दिन का समय मांगा।
हाईकोर्ट ने शासन के अनुरोध को स्वीकार करते हुए मामले की अगली सुनवाई निर्धारित की है, जिसके बाद काउंसलिंग प्रक्रिया को लेकर स्थिति पूरी तरह साफ हो सकेगी।

