2025: छत्तीसगढ़ के लिए यादों, बदलावों और घटनाओं से भरा एक ऐतिहासिक वर्ष

रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में बहुप्रतीक्षित पुलिस कमिश्नरेट प्रणाली को लागू करने का फैसला आखिरकार हो गया है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में हुई साल की अंतिम कैबिनेट बैठक में यह अहम निर्णय लिया गया। उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने बैठक के बाद जानकारी देते हुए बताया कि रायपुर में 23 जनवरी से कमिश्नरेट सिस्टम प्रभावी हो जाएगा। इसके लागू होते ही राजधानी की कानून-व्यवस्था में बड़ा प्रशासनिक बदलाव देखने को मिलेगा।

गौरतलब है कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर रायपुर में पुलिस कमिश्नरेट प्रणाली लागू करने की घोषणा की थी। अब कैबिनेट की मंजूरी के बाद यह व्यवस्था धरातल पर उतरने जा रही है। सरकार का मानना है कि इससे अपराध नियंत्रण, त्वरित निर्णय और कानून व्यवस्था को और मजबूत किया जा सकेगा।

**क्या है पुलिस कमिश्नरेट सिस्टम**
पुलिस कमिश्नरेट प्रणाली देश के कई बड़े महानगरों जैसे दिल्ली, मुंबई, अहमदाबाद, भोपाल और इंदौर में पहले से लागू है। इस व्यवस्था में शहर की कानून-व्यवस्था की कमान एक वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी के हाथों में होती है, जो आमतौर पर आईजी, एडीजी या डीजी रैंक के होते हैं। किस रैंक का अधिकारी तैनात होगा, यह राज्य सरकार तय करती है और यह शहर की आबादी व अपराध की स्थिति पर निर्भर करता है।
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**कमिश्नर को मिलेंगे व्यापक अधिकार**
कमिश्नरेट सिस्टम लागू होने के बाद पुलिस आयुक्त के पास वे अधिकार होंगे, जो अब तक जिला कलेक्टर या मजिस्ट्रेट के पास होते थे। इनमें धारा 144 लागू करना, कर्फ्यू लगाना, धरना-प्रदर्शन की अनुमति देना, आर्म्स एक्ट के तहत कार्रवाई करना, बड़े आयोजनों की अनुमति देना और जिला बदर जैसी प्रतिबंधात्मक कार्रवाई शामिल है। इससे किसी भी आपात स्थिति में पुलिस को तुरंत निर्णय लेने की शक्ति मिलेगी और प्रशासनिक प्रक्रिया तेज होगी।

**कलेक्टर के अधिकार होंगे सीमित**
नई व्यवस्था के लागू होने के बाद कलेक्टर की भूमिका मुख्य रूप से राजस्व कार्यों तक सीमित हो जाएगी। कानून-व्यवस्था से जुड़े अधिकांश अधिकार पुलिस कमिश्नर के अधीन होंगे, जिससे प्रशासनिक जिम्मेदारियों का स्पष्ट विभाजन हो जाएगा।

**एसपी और आईजी की भूमिका में बदलाव**
कमिश्नरेट सिस्टम के तहत जिले की लॉ एंड ऑर्डर की जिम्मेदारी सीधे पुलिस कमिश्नर के पास होगी। यदि आवश्यकता पड़ी तो ग्रामीण क्षेत्रों के लिए अलग से एसपी (रूरल) की नियुक्ति की जा सकती है। वहीं, यदि पूरा जिला कमिश्नरेट के दायरे में आता है तो वर्तमान एसपी स्तर के अधिकारियों को डीसीपी के रूप में तैनात किया जा सकता है।

सरकार का मानना है कि इस व्यवस्था से अपराध नियंत्रण में तेजी आएगी, पुलिस की जवाबदेही बढ़ेगी और आम जनता को त्वरित न्याय व सुरक्षा मिल सकेगी। 23 जनवरी से रायपुर एक नई प्रशासनिक व्यवस्था में प्रवेश करेगा, जिससे राजधानी की कानून-व्यवस्था को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।
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