नई दिल्ली: देश भर में चार महीने तक सक्रिय रहने के बाद दक्षिण-पश्चिम मानसून की वापसी का सिलसिला औपचारिक रूप से शुरू हो गया है। मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, 19 सितंबर से पश्चिमी राजस्थान के रास्ते मानसून की विदाई के लिए अनुकूल परिस्थितियां बन गई हैं। मध्य क्षोभमंडल में सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ और अरब सागर से आ रही नमी के चलते कुछ हिस्सों में हल्की गतिविधियां जरूर दर्ज की गईं, लेकिन मानसूनी ट्रफ (द्रोणी) के कमजोर पड़ने के साथ ही अब उत्तर और उत्तर-पश्चिम भारत में बारिश का दौर तेजी से थमने लगा है।
विदाई शुरू, 22 सितंबर तक उत्तर भारत में मौसम होगा शुष्क
मौसम विभाग के अनुसार, देश के उत्तर-पश्चिमी हिस्से से मानसून के लौटने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है: सबसे पहले पश्चिमी राजस्थान के सीमावर्ती इलाकों से मानसूनी हवाएं पीछे हटना शुरू करती हैं। इसके प्रभाव से पश्चिमी उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा और दिल्ली-एनसीआर में भी बारिश की गतिविधियां लगभग समाप्त हो जाएंगी। 20 सितंबर से पश्चिमी क्षेत्रों और 22 सितंबर तक उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में मानसूनी बारिश पूरी तरह थमने तथा मौसम के शुष्क होने के आसार हैं। हालांकि, स्थानीय स्तर पर छिटपुट बादलों की आवाजाही और हल्की बूंदाबांदी की संभावना से पूरी तरह इनकार नहीं किया जा सकता।
सितंबर में बारिश का गणित: पूर्वी हिस्से सूखे, पश्चिम में राहत
विदाई से पहले सितंबर महीने के बारिश के आंकड़ों में क्षेत्रीय स्तर पर बड़ा अंतर देखने को मिला है: 1 से 16 सितंबर के दौरान उत्तर भारत के कई बड़े हिस्सों में मानसूनी बारिश सामान्य से करीब 4% कम दर्ज की गई है।जहां पूर्वी अंचलों में बारिश सामान्य से करीब 10% कम रही, वहीं पश्चिमी अंचलों ने 5% अतिरिक्त बारिश के साथ बेहतर प्रदर्शन किया। बारिश थमने के साथ ही मैदानी इलाकों में दिन के समय धूप-छांव और हल्की उमस का असर बढ़ रहा है, जो मानसून की वापसी का पारंपरिक संकेत माना जाता है। आने वाले दिनों में देश के अधिकांश हिस्सों में मौसम साफ रहने का अनुमान है।

