लखनऊ: उत्तर प्रदेश में बाल पोषण और स्वास्थ्य सेवाओं के सुदृढ़ीकरण के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS-6) के ताजा आंकड़ों के अनुसार, पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों में नाटापन (उम्र के अनुपात में कम लंबाई यानी स्टंटिंग) की समस्या में 8.2 प्रतिशत अंक की उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है। विगत चार वर्षों में राज्य में नाटेपन का आंकड़ा 39.7 प्रतिशत से घटकर अब 31.5 प्रतिशत पर आ गया है, जो कुपोषण के खिलाफ अभियान की बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।
शुरुआती 1000 दिन बने गेमचेंजर: पोषण और टीकाकरण का असर
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने इस सुधार को निरंतर स्वास्थ्य सेवाओं और पारिवारिक जागरूकता का प्रतिफल बताया है:
-
दीर्घकालिक देखभाल का परिणाम: राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) की मिशन निदेशक डॉ. पिंकी जोवेल के अनुसार, बच्चों की लंबाई में आया यह सकारात्मक बदलाव लंबे समय तक मिले बेहतर पोषण, प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार और परिवार द्वारा बच्चों की उचित देखभाल का नतीजा है।
-
पहले 1000 दिन बेहद अहम: किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (KGMU) के बाल रोग विभाग की प्रोफेसर डॉ. शालिनी त्रिपाठी के अनुसार, गर्भधारण से लेकर बच्चे के 2 वर्ष का होने तक के शुरुआती 1000 दिन उसके संपूर्ण शारीरिक और मानसिक विकास की नींव होते हैं। नियमित स्वास्थ्य जांच, समय पर पूर्ण टीकाकरण, शुरुआती छह माह तक केवल स्तनपान और उसके बाद पौष्टिक पूरक आहार ने बच्चों को क्रोनिक कुपोषण से बचाने में अहम भूमिका निभाई है।
उत्तर प्रदेश बनाम राष्ट्रीय औसत: क्या कहते हैं आंकड़े?
एनएफएचएस-5 से एनएफएचएस-6 के बीच राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर दर्ज किए गए तुलनात्मक आंकड़े:
-
उत्तर प्रदेश में सुधार: एनएफएचएस-5 में राज्य के 39.7% बच्चे नाटेपन, 17.3% दुबलेपन (वेस्टिंग) और 32.1% कम वजन (अंडरवेट) की श्रेणी में दर्ज थे। नए सर्वेक्षण में नाटेपन का स्तर गिरकर 31.5% रह गया है।
-
राष्ट्रीय स्तर पर प्रगति: देशभर में पांच साल से कम उम्र के बच्चों में नाटेपन की दर पहले के 35.5% से घटकर अब 29.3% दर्ज की गई है।
बच्चों में नाटेपन की दर को दीर्घकालिक कुपोषण का सबसे सटीक पैमाना माना जाता है। केंद्र और राज्य सरकार द्वारा संचालित पोषण अभियान, आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से पुष्टाहार वितरण और मातृ-शिशु स्वास्थ्य कार्यक्रमों के जमीनी क्रियान्वयन से उत्तर प्रदेश राष्ट्रीय औसत के फासले को तेजी से कम कर रहा है।



