‘रुक गए तो साधना टूट जाएगी’
मनोकामना पूर्ति का विश्वास: कोई नौकरी में पदोन्नति, तो कोई व्यापार में सफलता, बेहतर शिक्षा या परिवार की सुख-शांति की मनोकामना लेकर यह कठिन साधना करता है। श्रद्धालुओं का दृढ़ विश्वास है कि इतनी निष्ठा से चढ़ाया गया ‘डाक जल’ बाबा बैद्यनाथ सहर्ष स्वीकार करते हैं और मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं।
कांवरिया पथ पर सेवा का महाकुंभ
रात भर गूंजता ‘हर-हर महादेव’, भक्ति के रंग में रंगा कांवरिया पथ
जैसे-जैसे सूरज ढलता है, कांवरिया पथ का नजारा और भी अलौकिक हो जाता है। अंधेरा घिरते ही डाक कांवरियों की गति थामने के बजाय और तेज हो जाती है। पूरे रास्ते में जल रहे दूधिया बल्बों और टॉर्च की रोशनी के बीच केवल एक ही हुंकार सुनाई देती है— “हर-हर महादेव” और “बाबा नगरिया दूर है, जाना जरूर है”\।
थकान से चूर शरीर को यही जयकारे नई ऊर्जा प्रदान करते हैं। कई डाकबम नंगे पैर दौड़ते हुए पैरों में पड़े छालों की परवाह किए बिना आगे बढ़ते हैं। रास्ते में मौजूद स्थानीय ग्रामीण और श्रद्धालु उनके गुजरने वाले रास्ते को पानी से साफ करते दिखते हैं ताकि दौड़ते हुए डाकबमों को कंकड़-पत्थर न चुभें।
महिला और युवा डाकबमों का भी अभूतपूर्व उत्साह
सुलतानगंज से बाबाधाम की इस कठिन 105 किलोमीटर की यात्रा में केवल पुरुष ही नहीं, बल्कि बड़ी संख्या में महिला और युवा डाकबम भी अपनी आस्था का परिचय दे रहे हैं।
अद्भुत इच्छाशक्ति: कई महिला डाकबम अपनी पीठ पर गंगाजल की पोटली बांधकर पुरुषों के कंधे से कंधा मिलाकर दौड़ती नजर आती हैं।
युवाओं की लगन: पहली बार डाक जल उठाने वाले युवाओं का कहना है कि शुरुआत में दूरी को लेकर मन में थोड़ा डर जरूर था, लेकिन जैसे ही सुलतानगंज से जल उठाया, बाबा की ऐसी असीम कृपा हुई कि पैर अपने आप आगे बढ़ते चले गए।
बाबा के दरबार में पहुंचकर मिलता है परम आनंद
24 घंटे के कठिन सफर और अनवरत दौड़ के बाद जब यह डाकबम बाबा बैद्यनाथ के मुख्य मंदिर के प्रांगण में प्रवेश करते हैं, तो उनकी आँखों से खुशी और भक्ति के आँसू छलक पड़ते हैं।
मंदिर प्रशासन द्वारा डाक कांवरियों के लिए जलाभिषेक की विशेष और त्वरित व्यवस्था की जाती है, ताकि वे बिना किसी विलंब के ज्योतिर्लिंग पर जल अर्पित कर सकें। जैसे ही उत्तरवाहिनी गंगा का पवित्र जल बाबा बैद्यनाथ पर अर्पित होता है, डाकबमों के चेहरे पर 105 किलोमीटर की पूरी थकान पल भर में गायब हो जाती है और उन्हें एक असीम आत्मिक शांति व संतोष का अनुभव होता है।

