नई दिल्ली: देश की पुरानी और सुस्त पड़ चुकी आपराधिक न्याय प्रणाली को पूरी तरह से बदलने और आम नागरिकों को सुलभ एवं त्वरित न्याय दिलाने के उद्देश्य से भारत सरकार ने ऐतिहासिक कदम उठाया है। सदियों पुराने अंग्रेजों के जमाने के कानूनों—भारतीय दंड संहिता (1860), दंड प्रक्रिया संहिता (1973) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम (1872)—को समाप्त कर उनकी जगह तीन नए कानून भारतीय न्याय संहिता (BNS), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम (BSA) लागू कर दिए गए हैं।
लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में गृह राज्य मंत्री श्री बंदी संजय कुमार ने बताया कि यह बदलाव विधि आयोग, मालिमाथ समिति, विश्वनाथन समिति और गृह मामलों की संसदीय स्थायी समिति की सिफारिशों के आधार पर किया गया है, ताकि टुकड़ों में संशोधन करने के बजाय पूरे कानूनी ढांचे की व्यापक समीक्षा की जा सके।
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हर प्रक्रिया की समय-सीमा तय: जानिए कब क्या होगा?
नए कानूनों की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें जांच (Investigation), सुनवाई (Trial) और फैसले की पूरी प्रक्रिया के लिए सख्त समय-सीमा (Timeline) तय की गई है, ताकि तारीख पर तारीख के झंझट से मुक्ति मिल सके:
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प्रारंभिक पूछताछ: 14 दिनों के भीतर पूरी करनी होगी।
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महिलाओं/बच्चों के खिलाफ अपराध: सूचना मिलने के 2 महीने (60 दिन) के भीतर जांच पूरी करना अनिवार्य।
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आगे की जांच (Further Investigation): अधिकतम 90 दिनों में पूरी होगी।
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दस्तावेज उपलब्ध कराना: पीड़ित और आरोपी को 14 दिनों के भीतर सभी कानूनी दस्तावेज दिए जाएंगे।
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आरोप तय करना (Charge Framing): 60 दिनों के भीतर आरोप तय किए जाएंगे।
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अदालती निर्णय (Judgment): सुनवाई पूरी होने के 45 दिनों के भीतर फैसला सुनाना अनिवार्य होगा।
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दया याचिका (Mercy Petition): राज्यपाल के समक्ष 30 दिन और राष्ट्रपति के समक्ष 60 दिन के भीतर दाखिल करनी होगी।
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अनावश्यक स्थगन (Adjournment) पर रोक: मुकदमों में अनिश्चितकालीन देरी रोकने के लिए अधिकतम दो बार ही स्थगन की अनुमति होगी।
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ई-साक्ष्य, ई-समन और न्याय-श्रुति से बढ़ेगी पारदर्शिता
अदालती कार्यवाही को गति और दक्षता देने के लिए नए युग की डिजिटल तकनीकों को भी कानूनी रूप से अनिवार्य बनाया गया है:
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ई-साक्ष्य (e-Sakshya): डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को वैज्ञानिक तरीके से, बिना किसी छेड़छाड़ के सुरक्षित रखने और अदालत में पेश करने में मदद करता है।
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ई-समन (e-Summon): इलेक्ट्रानिक माध्यम से तत्काल समन भेजने की सुविधा देता है, जिससे प्रक्रिया तेज होती है और इसे ट्रैक करना आसान हो जाता है।
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न्याय-श्रुति (Nyay-Shruti): वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अभियुक्तों, गवाहों, पुलिस अधिकारियों, डॉक्टरों और विशेषज्ञों की आभासी (Virtual) पेशी को आसान बनाता है, जिससे अदालतों का समय और संसाधन दोनों बचेंगे।
सरकार का यह कदम देश में कानून व्यवस्था के प्रति जनता के विश्वास को मजबूत करेगा और पीड़ितों को वर्षों तक न्याय के इंतजार से मुक्ति दिलाएगा।
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