रायपुर
छत्तीसगढ़ सरकार ने प्रदेश की सहकारी अर्थव्यवस्था को मजबूती देने की दिशा में एक बड़ा और निर्णायक कदम उठाया है। अब राज्य की सभी सरकारी बैठकों, प्रशिक्षण कार्यक्रमों, कार्यशालाओं और अन्य शासकीय आयोजनों में निजी ब्रांडों के बजाय छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी दुग्ध महासंघ के ‘देवभोग’ ब्रांड के दूध और दुग्ध उत्पादों का उपयोग अनिवार्य कर दिया गया है। मुख्य सचिव कार्यालय द्वारा इस संबंध में जारी निर्देशों के बाद नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने प्रदेश के सभी नगर निगमों, नगर पालिकाओं और नगर पंचायतों को आदेश जारी कर इसे कड़ाई से लागू करने को कहा है।
सरकार का यह निर्णय राज्य के दुग्ध उत्पादकों और सहकारी ढांचे को एक बड़ा संस्थागत बाजार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से लिया गया है। इस आदेश के माध्यम से अब शासकीय स्तर पर टोंड, स्टैंडर्ड, फुल क्रीम और डबल टोंड दूध के साथ-साथ दही, लस्सी, छाछ, पनीर, मक्खन, घी, खोवा, रबड़ी, फ्लेवर मिल्क, मिल्क केक और पेड़ा जैसे उत्पादों की सीधे खरीद सुनिश्चित की जाएगी।
इस नीति के क्रियान्वयन से न केवल शासकीय आयोजनों में स्थानीय उत्पादों को प्रोत्साहन मिलेगा, बल्कि इसका अप्रत्यक्ष लाभ उन हजारों स्थानीय दुग्ध उत्पादकों को भी होगा जो सहकारी समितियों के माध्यम से जुड़े हुए हैं। स्थानीय स्तर पर इन उत्पादों की मांग बढ़ने से सहकारी महासंघ की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ होगी और राज्य के भीतर ‘वोकल फॉर लोकल’ की भावना को धरातल पर उतारा जा सकेगा। नगरीय प्रशासन विभाग ने अपने सभी क्षेत्रीय संयुक्त संचालकों और नगरीय निकाय प्रभारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वे सरकारी कार्यक्रमों में निजी उत्पादों के स्थान पर देवभोग ब्रांड की उपलब्धता सुनिश्चित करें, ताकि स्थानीय सहकारी क्षेत्र को प्राथमिकता दी जा सके।<

