नई दिल्ली/रायपुर: भारत अब अपने भूजल संसाधनों को बचाने के लिए विज्ञान और तकनीक के सबसे उन्नत दौर में प्रवेश कर चुका है। जल शक्ति मंत्रालय ने अब जमीन के नीचे छिपे जल भंडार की निगरानी के लिए टेलीमेट्री प्रणाली और डिजिटल जल स्तर रिकॉर्डर (DWLR) का एक देशव्यापी नेटवर्क तैयार किया है। अब भूजल के स्तर और उसकी शुद्धता की जानकारी किसी पुरानी रिपोर्ट के भरोसे नहीं, बल्कि ‘रियल टाइम’ (तुरंत) आधार पर डिजिटल स्क्रीन पर उपलब्ध होगी।

डिजिटल मॉनिटरिंग: तकनीक जब बनी जीवनदायिनी

अटल भूजल योजना और राष्ट्रीय जल विज्ञान परियोजना के तहत, देश के विभिन्न कोनों में ऐसे स्मार्ट सेंसर लगाए गए हैं जो हर पल यह डेटा भेजते हैं कि जमीन के नीचे पानी का स्तर क्या है।केंद्रीय भूमि जल बोर्ड (CGWB) अब इन आंकड़ों के आधार पर हर साल उन तहसील और ब्लॉकों की पहचान कर रहा है जहाँ पानी की भारी कमी है। अगर किसी क्षेत्र में औद्योगिक कचरे या अन्य कारणों से भूजल प्रदूषित होता है, तो नई मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) के तहत तत्काल ‘पाक्षिक अलर्ट’ जारी किए जाते हैं।

‘जल संचय’ अब बना जन-आंदोलन

सरकार का मानना है कि पानी का प्रबंधन केवल सरकारी फाइलों से नहीं, बल्कि ‘जन भागीदारी’ से संभव है। देश भर में लगभग 69,000 अमृत सरोवरों का निर्माण और पुनरुद्धार किया जा चुका है, जो मानसून के पानी को सहेजकर भूजल स्तर को ऊपर उठाने का काम कर रहे हैं। इस अभियान के जरिए समुदायों को प्रशिक्षित किया जा रहा है कि वे अपने स्थानीय स्तर पर कम लागत वाले जल संचयन ढांचे कैसे विकसित करें।

खेतों में ‘प्रति बूंद अधिक फसल’ का मंत्र

चूंकि भारत में भूजल का सबसे बड़ा हिस्सा कृषि में खर्च होता है, इसलिए सरकार ने ‘पर ड्रॉप मोर क्रॉप’ योजना पर जोर दिया है। सूक्ष्म सिंचाई (Micro Irrigation) के माध्यम से किसानों को सिखाया जा रहा है कि कैसे कम पानी में बेहतर और ज्यादा पैदावार ली जा सकती है। यह न केवल पानी बचाता है, बल्कि खेती को भी लंबे समय के लिए टिकाऊ बनाता है।

औद्योगिक कचरे से भूजल को बचाने के लिए नियम कड़े कर दिए गए हैं। अब उद्योगों के लिए कूप शीर्ष (Well Head) सुरक्षा उपाय करना अनिवार्य है। बिना अनुमति और सुरक्षा मानकों के भूजल का दोहन करने वाले उद्योगों पर नकेल कसी जा रही है, ताकि आने वाली पीढ़ियों को ‘जहरीले भूजल’ से बचाया जा सके।

डिजिटल निगरानी, सामुदायिक नेतृत्व और आधुनिक कृषि पद्धतियों का यह संगम भारत को एक ‘जल-सुरक्षित’ भविष्य की ओर ले जा रहा है। तकनीक और जन-भागीदारी की यह जुगलबंदी सुनिश्चित करेगी कि देश की प्रगति की रफ्तार पानी की कमी के कारण कभी न थमे।

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