जशपुर: छत्तीसगढ़ के उत्तर-पूर्वी छोर पर स्थित जशपुर जिला, अपनी ऊँची-नीची पहाड़ियों और घने जंगलों के लिए जाना जाता है। यहाँ पानी की उपलब्धता जितनी बड़ी चुनौती है, उससे कहीं बड़ी चुनौती उसकी ‘शुद्धता’ रही है। लेकिन अब जल जीवन मिशन के तहत जशपुर का जल परीक्षण ढांचा पूरी तरह बदल चुका है। राज्य के 78 लैब के नेटवर्क में जशपुर की प्रयोगशालाएं अब जिले के लिए एक ‘स्वास्थ्य कवच’ का काम कर रही हैं।
जशपुर का भू-भाग पठारी और खनिज संपन्न है। यहाँ के पानी में अक्सर आयरन (लोहा) और अन्य भारी तत्वों की अधिकता पाई जाती है, जो लंबे समय में गंभीर बीमारियों का कारण बनते हैं। जिले में स्थापित अत्याधुनिक प्रयोगशालाएं अब केवल पानी के रंग को नहीं, बल्कि उसमें घुले सूक्ष्म रसायनों और बैक्टीरिया की भी सटीक जांच कर रही हैं। WTP और टोटी तक निगरानी: अब जांच केवल मुख्य स्रोत तक सीमित नहीं है। पहाड़ियों से झरने के रूप में आने वाले पानी को वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट (WTP) में साफ करने के बाद, पाइपलाइनों और फिर घर के नल तक—हर मोड़ पर पानी का ‘क्वालिटी चेक’ किया जा रहा है।
मध्य भारत में शुद्ध पानी की ‘जंग’: लैब नेटवर्क में छत्तीसगढ़ की ऊंची छलांग, ओडिशा और झारखंड को पीछे छोड़ा
अब आम जशपुरिया भी है ‘जल प्रहरी’
इस नई सेवा की सबसे बड़ी ताकत इसकी जन-सुलभता है। अब जशपुर का कोई भी ग्रामीण अपने घर के कुएं या हैंडपंप के पानी का नमूना लेकर सरकारी लैब जा सकता है और बहुत कम फीस में यह जान सकता है कि उसका पानी पीने योग्य है या नहीं। जिले के दूरस्थ बगीचा या पंड्रापाठ जैसे वनांचलों के लिए मोबाइल लैब की सुविधा एक वरदान साबित हो रही है, जहाँ जांच की मशीनें खुद चलकर लोगों के दरवाजे तक पहुँच रही हैं।
सरकार ने जशपुर के हर गांव का डेटा JJM-WQMIS पोर्टल पर लाइव कर दिया है। ‘सिटीजन कॉर्नर’ के माध्यम से अब जिले का कोई भी पढ़ा-लिखा युवा अपने गांव की जलापूर्ति की गुणवत्ता रिपोर्ट ऑनलाइन देख सकता है। यह पारदर्शिता विभाग को जवाबदेह बनाती है और ग्रामीणों में विश्वास पैदा करती है। छत्तीसगढ़ की जिन 47 लैब को राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता (Accreditation) मिली है, उनमें जशपुर की लैब भी अपनी प्रामाणिकता साबित कर रही हैं। इसका मतलब है कि जशपुर की लैब से मिली रिपोर्ट अब दिल्ली या मुंबई की लैब जितनी ही भरोसेमंद है।
चुनौतियों के पाले में तपकर निखरा जशपुर का ‘लाल हीरा’, अब ग्लोबल मार्केट पर नजर
जशपुर अब केवल ‘प्रकृति की गोद’ में बसा जिला नहीं रह गया है, बल्कि यह शुद्ध पेयजल के विज्ञान से भी लैस हो चुका है। दिसंबर 2024 की नई गाइडलाइन्स के बाद, स्रोत से लेकर घर की टोटी तक बिछा यह लैब नेटवर्क जशपुर के हर नागरिक को एक स्वस्थ भविष्य की गारंटी दे रहा है।
देश में बिछा जल परीक्षण प्रयोगशालाओं का जाल, अब आपके नल के पानी पर होगी पैनी नजर

