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भारत सरकार के दूरसंचार विभाग ने देश में दूरसंचार नेटवर्क की सुरक्षा को अभेद्य बनाने और साइबर अपराधों पर लगाम लगाने के लिए कई नीतिगत और तकनीकी उपाय किए हैं, जिनका उद्देश्य नागरिकों को वित्तीय धोखाधड़ी और तकनीकी दुरुपयोग से बचाना है।
खोए हुए मोबाइल की बरामदगी और फर्जी सिम पर कार्रवाई दूरसंचार विभाग की ‘संचार साथी’ पहल और राज्यों की पुलिस के समन्वय से अब तक 27.96 लाख खोए या चोरी हुए मोबाइल हैंडसेटों को ट्रेस किया जा चुका है, जिनमें से 8.33 लाख से अधिक हैंडसेट बरामद कर उनके असली मालिकों को सौंप दिए गए हैं। इसके साथ ही, विभाग ने नागरिकों द्वारा दी गई जानकारी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित ‘ASTR’ टूल के माध्यम से पहचान कर 2.24 करोड़ से अधिक संदिग्ध मोबाइल कनेक्शनों को काट दिया है, जिससे बड़े पैमाने पर होने वाली धोखाधड़ी को रोकने में मदद मिली है।
अंतरराष्ट्रीय स्पूफिंग और वित्तीय सुरक्षा में बड़ी सफलता साइबर अपराधियों द्वारा भारतीय नंबर दिखाकर की जाने वाली अंतरराष्ट्रीय स्पूफ़्ड कॉल्स को ब्लॉक करने की प्रणाली विकसित की गई है, जिसके परिणामस्वरूप ऐसी कॉल्स के प्रयासों में 99 प्रतिशत की प्रभावी कमी आई है। वित्तीय सुरक्षा के क्षेत्र में विभाग ने ‘फाइनेंशियल फ्रॉड रिस्क इंडिकेटर’ (FRI) जैसा रिस्क-बेस्ड मेट्रिक तैयार किया है, जिसकी मदद से बैंकों और यूपीआई सेवा प्रदाताओं ने समय रहते कार्रवाई करते हुए अब तक 1,000 करोड़ रुपये से अधिक की धोखाधड़ी राशि को सफलतापूर्वक रोका है।
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नेटवर्क सुरक्षा और तकनीकी निगरानी का सुदृढ़ीकरण नेटवर्क की मजबूती के लिए दूरसंचार सेवा प्रदाताओं के लिए प्रतिवर्ष आंतरिक ऑडिट और हर तीन साल में बाहरी मान्यता प्राप्त एजेंसियों से सुरक्षा ऑडिट कराना अनिवार्य कर दिया गया है। विभाग ने ‘डिजिटल इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म’ (DIP) के माध्यम से पुलिस, बैंकों और अन्य वित्तीय संस्थानों के बीच रीयल-टाइम सूचना साझा करने की व्यवस्था की है, जबकि ‘दूरसंचार सुरक्षा संचालन केंद्र’ (TSOC) और ‘T-CSIRT’ जैसे ढांचे साइबर घटनाओं की निगरानी और त्वरित समाधान सुनिश्चित कर रहे हैं।
जागरूकता और जन-भागीदारी की नई पहल नागरिकों को जागरूक करने के लिए विभाग ने बहुभाषी अभियानों के साथ-साथ ‘संचार मित्र’ योजना शुरू की है, जिसमें छात्र वॉलंटियर्स लोगों को डिजिटल सुरक्षा और ‘संचार साथी’ पोर्टल के उपयोग के बारे में शिक्षित कर रहे हैं। साथ ही, आपदा प्रबंधन के लिए ‘कॉमन अलर्टिंग प्रोटोकॉल’ (CAP) को राष्ट्रव्यापी स्तर पर लागू किया गया है, जो संकट के समय क्षेत्रीय भाषाओं में सटीक और समय पर चेतावनी संदेश भेजने में सक्षम है।

