सेंटीमीटर तक की मिलेगी सटीक लोकेशन: भारत में 1,145 हाई-टेक स्टेशनों का नेटवर्क तैयार, ‘राष्ट्रीय भू-स्थानिक मिशन’ का हुआ आगाज़

नई दिल्ली: भारत सरकार की ‘राष्ट्रीय नीति और कार्य योजना 2015’ ने देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए कभी बड़ी चुनौती रहे वामपंथी उग्रवाद की जड़ों को हिलाकर रख दिया है। गृह मंत्रालय द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, सरकार की चौतरफा घेराबंदी का ही परिणाम है कि नक्सली हिंसा की घटनाएं साल 2010 के मुकाबले 88 प्रतिशत तक कम हो गई हैं। सुरक्षा के मोर्चे पर मिली इस सफलता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि प्रभावित जिलों की संख्या 2018 में जहाँ 126 थी, वहीं दिसंबर 2025 तक यह घटकर मात्र 8 जिलों तक सिमट गई है। अब देश में केवल 3 जिले ही ऐसे बचे हैं जिन्हें ‘अत्यधिक प्रभावित’ की श्रेणी में रखा गया है।

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सरकार ने उग्रवाद से निपटने के लिए न केवल हथियारों का सहारा लिया, बल्कि उनके फंडिंग नेटवर्क और आर्थिक सोतों को भी पूरी तरह सुखा दिया है। गृह मंत्रालय में गठित ‘टेरर फंडिंग सेल’ और NIA की विशेष इकाइयों के माध्यम से नक्सलियों को मिलने वाली वित्तीय मदद को ब्लॉक कर दिया गया है। इसके साथ ही राज्यों की पुलिस क्षमता बढ़ाने के लिए सुरक्षा संबंधी व्यय (SRE) योजना के तहत ₹3,600 करोड़ से अधिक की राशि जारी की गई है। पटरियों और जंगलों में सुरक्षा को अभेद्य बनाने के लिए अब तक 656 आधुनिक किलेबंद पुलिस स्टेशन तैयार किए जा चुके हैं और हवाई निगरानी के लिए हेलीकॉप्टर सहायता भी बढ़ाई गई है।

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उग्रवाद की राह छोड़ मुख्यधारा में लौटने वालों के लिए सरकार ने एक बेहद उदार और आकर्षक ‘आत्मसमर्पण-सह-पुनर्वास’ नीति पेश की है। इसके तहत आत्मसमर्पण करने वाले उच्च श्रेणी के नक्सलियों को ₹5 लाख और अन्य कैडरों को ₹2.5 लाख का तत्काल अनुदान दिया जाता है। उन्हें समाज में फिर से स्थापित करने के लिए तीन साल तक ₹10,000 का मासिक वजीफा और उनकी पसंद के व्यवसाय में पेशेवर प्रशिक्षण भी प्रदान किया जाता है। इसी मानवीय दृष्टिकोण का सुखद परिणाम है कि साल 2025 में ही 2,337 नक्सलियों ने हथियार डाल दिए और मुख्यधारा के विकास से जुड़ने का फैसला किया।

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विकास के मोर्चे पर सरकार ने उन दुर्गम इलाकों तक अपनी पहुँच बनाई है जहाँ कभी नक्सलियों का खौफ हुआ करता था। सड़क नेटवर्क विस्तार की दो विशेष योजनाओं के माध्यम से उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों में 15,000 किलोमीटर से अधिक सड़कों का जाल बिछाया गया है और डिजिटल कनेक्टिविटी को सशक्त करने के लिए 9,000 से ज्यादा टेलीकॉम टावर लगाए गए हैं। आदिवासी बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए 179 एकलव्य आवासीय विद्यालय संचालित किए जा रहे हैं, जबकि वित्तीय समावेशन के लिए इन क्षेत्रों में 6,000 से अधिक पोस्ट ऑफिस और 1,300 से ज्यादा ATM शुरू किए गए हैं। सरकार की यह प्रतिबद्धता दर्शाती है कि वह न केवल उग्रवाद को पूरी तरह खत्म करने, बल्कि प्रभावित क्षेत्रों में शांति और समृद्धि का नया सवेरा लाने के लिए पूरी तरह तैयार है।

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