भारत सरकार ने 6 फरवरी 2026 को स्पष्ट किया कि देश में दवाओं की कीमतें औषधि मूल्य नियंत्रण आदेश (DPCO) 2013 के तहत विनियमित की जाती हैं, जिसका मुख्य उद्देश्य आवश्यक दवाओं को किफायती दरों पर उपलब्ध कराना और दवा उद्योग में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देना है। इस व्यवस्था के अंतर्गत राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (NPPA) उन दवाओं की अधिकतम कीमत निर्धारित करता है जिनकी बाजार हिस्सेदारी एक प्रतिशत से अधिक है, जबकि गैर-अनुसूचित दवाओं के लिए वार्षिक मूल्य वृद्धि की सीमा 10 प्रतिशत तय की गई है।
इसके साथ ही, मरीजों पर आर्थिक बोझ कम करने के लिए सरकार ने डॉक्टरों के लिए पर्चे पर दवाओं के जेनेरिक नाम साफ और बड़े अक्षरों में लिखना अनिवार्य कर दिया है, और ऐसा न करने वाले डॉक्टरों के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई का प्रावधान भी किया गया है। स्वास्थ्य सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए सरकार ने अब तक 600 से अधिक हानिकारक दवाओं और संयोजनों पर प्रतिबंध लगा दिया है, जिनका निर्माण या बिक्री करना अब एक दंडनीय अपराध है। अंततः, सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि हर दवा के पैकेट पर उसकी सही कीमत छपी हो और आपूर्ति श्रृंखला में किसी भी स्तर पर उपभोक्ताओं से अधिक वसूली न की जाए।

