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नई दिल्ली: त्योहारी सीजन से ठीक पहले घर की रसोई का बजट एक बार फिर बुरी तरह लड़खड़ाने लगा है। अरहर दाल, खाद्य तेल, आलू और प्याज जैसी दैनिक उपभोग की आवश्यक वस्तुओं की खुदरा कीमतों में तेज उछाल दर्ज किया गया है। सब्जियों और दालों की आसमान छूती कीमतों ने आम आदमी की थाली को महंगा कर दिया है। उपभोक्ता मामले विभाग के नवीनतम आंकड़ों के मुताबिक, केवल खाद्य तेलों में ही बीते एक साल के भीतर 31 रुपये प्रति किलो तक की भारी वृद्धि देखने को मिली है।
प्याज हुआ दोगुना से अधिक महंगा, दालों के भाव भी चढ़े विभाग द्वारा जारी दैनिक खुदरा आंकड़ों के अनुसार खाद्य सामग्री की कीमतों में तेज बढ़ोतरी हुई है:
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प्याज के दाम दोगुने: 20 सितंबर को प्याज का औसत खुदरा मूल्य 54.23 रुपये प्रति किलो दर्ज किया गया, जो पिछले साल इसी अवधि में महज 25.97 रुपये प्रति किलो था।
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टमाटर और आलू: टमाटर का खुदरा भाव 36.48 रुपये से बढ़कर 39.16 रुपये प्रति किलो पर पहुंच गया है, वहीं आलू भी 22 रुपये प्रति किलो के पार बिक रहा है।
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दालों में तेजी: दलहन वर्ग में प्रमुख अरहर (तुअर) दाल का औसत खुदरा भाव 124.23 रुपये प्रति किलो हो चुका है, जो पिछले साल 113.66 रुपये था। इसके अलावा चना, उड़द, मूंग और मसूर दालों के दामों में भी तेजी बनी हुई है।
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खाद्य तेलों की कीमतों में भारी उछाल (रुपये प्रति किलो में) वैश्विक और घरेलू कारणों से कुकिंग ऑयल के दामों में 10 से 31 रुपये तक की बढ़ोतरी हुई है:
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सूरजमुखी तेल (Sunflower Oil): ₹161.40 से बढ़कर ₹192.56 (वृद्धि: ₹31.16)
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मूंगफली तेल (Groundnut Oil): ₹186.93 से बढ़कर ₹208.44 (वृद्धि: ₹21.51)
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सोया तेल (Soya Oil): ₹147.14 से बढ़कर ₹166.73 (वृद्धि: ₹19.52)
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पाम तेल (Palm Oil): ₹132.98 से बढ़कर ₹151.40 (वृद्धि: ₹18.42)
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सरसों तेल (Mustard Oil): ₹188.80 से बढ़कर ₹201.02 (वृद्धि: ₹12.22)
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वनस्पति तेल (Vanaspati): ₹156.74 से बढ़कर ₹167.16 (वृद्धि: ₹10.42)
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क्यों भड़की महंगाई? ये हैं तीन प्रमुख कारण विशेषज्ञों के अनुसार खाद्य पदार्थों में इस महंगाई के पीछे घरेलू उत्पादन और अंतरराष्ट्रीय समीकरण दोनों जिम्मेदार हैं:
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मानसून की बेरुखी: 17 सितंबर तक देश में मानसूनी बारिश में करीब 15 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। प्रमुख खरीफ उत्पादक क्षेत्रों में कमजोर बारिश के कारण धान और तिलहन की फसलों की पैदावार प्रभावित होने की आशंका है।
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पाम तेल और बायोफ्यूल नीति: भारत अपनी वनस्पति तेल की कुल जरूरत का 60% आयात करता है, जिसमें पाम तेल की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा (50-60%) है। प्रमुख उत्पादक देश इंडोनेशिया और मलेशिया अपने पाम तेल का बड़ा हिस्सा बायोफ्यूल बनाने में इस्तेमाल कर रहे हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसकी किल्लत और कीमतें बढ़ गई हैं।
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काला सागर का संकट और सूरजमुखी तेल: भारत बड़े पैमाने पर सूरजमुखी तेल रूस और यूक्रेन से मंगाता है। काला सागर (Black Sea) समुद्री मार्ग पर चल रहे तनाव और लॉजिस्टिक्स संबंधी बाधाओं के कारण वैश्विक सप्लाई चेन बाधित हुई है, जिसका सीधा असर भारत में सनफ्लावर ऑयल की खुदरा कीमतों पर दिख रहा है।


