बिलासपुर : छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने वैवाहिक अधिकारों की बहाली (Restitution of Conjugal Rights) को लेकर एक बेहद अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि किसी भी पत्नी को उसकी इच्छा के विरुद्ध जबरन पति के साथ रहने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता। न्यायमूर्ति पी.पी. साहू और न्यायमूर्ति सचिन सिंह राजपूत की युगल पीठ ने जशपुर जिले के एक मामले में पारिवारिक न्यायालय के फैसले को बरकरार रखते हुए पति की अपील को खारिज कर दिया।
अलग रहने के लिए पत्नी के पास पर्याप्त और वाजिब कारण: हाई कोर्ट
हाई कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि पत्नी का बार-बार मायके जाना या विधिक नोटिस भेजना मात्र यह साबित नहीं करता कि उसका ससुराल लौटने से इनकार करना गलत या अनुचित था। पीठ ने रिकॉर्ड का अवलोकन करते हुए कहा कि दहेज में क्रेटा कार और ₹5 लाख की मांग, शारीरिक प्रताड़ना, मारपीट के चलते गर्भपात और घरेलू हिंसा के गंभीर आरोपों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। इन गंभीर परिस्थितियों के बीच पत्नी के अलग रहने के पर्याप्त और संतोषजनक कारण मौजूद हैं।
फरवरी 2022 में हुई थी शादी, अक्टूबर से बिगड़े हालात
मामले के अनुसार जशपुर निवासी प्रवीण कुमार यादव का विवाह फरवरी 2022 में प्रियंका से हुआ था।
अक्टूबर 2022 में प्रियंका अपनी बीमार मां की देखभाल के लिए मायके गई थी, जिसके बाद उसने ससुराल लौटने से मना कर दिया।पति का दावा था कि उसने अक्टूबर और नवंबर में खुद जाकर व परिजनों को भेजकर पत्नी को वापस लाने की कई बार कोशिश की।
                  पत्थलगांव एसडीओ के समक्ष सुलह का आवेदन 31 मार्च 2023 को खारिज होने के बाद पति ने हिंदू विवाह अधिनियम के तहत साथ रहने की मांग को लेकर पारिवारिक न्यायालय में याचिका लगाई थी।
स्विफ्ट कार को बताया सस्ता, क्रेटा और ₹5 लाख के लिए किया प्रताड़ित
पारिवारिक न्यायालय और हाई कोर्ट के समक्ष पत्नी ने ससुराल पक्ष पर गंभीर आरोप लगाए: शादी में मायके पक्ष से मिली स्विफ्ट कार को कम कीमत की बताकर पति और ससुराल वाले लगातार क्रेटा कार और ₹5 लाख नकद की मांग कर रहे थे। मांग पूरी न होने पर की गई बेरहमी से मारपीट के कारण उसका गर्भपात (Miscarriage) हो गया, जिसकी शिकायत उसने जशपुर स्थित सखी वन स्टॉप सेंटर में भी दर्ज कराई थी।पत्नी ने पति के किसी अन्य युवती के साथ अनैतिक संबंध होने और उसके शैक्षणिक प्रमाण पत्र, पहचान पत्र, जाति प्रमाण पत्र व बैंक पासबुक जैसे जरूरी मूल दस्तावेज जबरन अपने पास दबाकर रखने का भी आरोप लगाया, जिसे लौटाने का आदेश फैमिली कोर्ट पहले ही दे चुकी थी।

हाई कोर्ट का बड़ा फैसला: रोस्टर में अनारक्षित पद का मतलब ‘सामान्य वर्ग के लिए आरक्षित’ नहीं; योग्यता होने पर आरक्षित वर्ग को भी मिलेगा प्रमोशन

इन सभी तथ्यों और अभिलेखों पर विचार करते हुए हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने फैमिली कोर्ट के आदेश में किसी भी प्रकार के हस्तक्षेप से इनकार कर दिया और पति की याचिका को सिरे से खारिज कर दिया।
Share.

About Us

CG NOW एक भरोसेमंद और निष्पक्ष न्यूज़ प्लेटफॉर्म है, जो आपको छत्तीसगढ़, भारत और दुनिया भर की ताज़ा, सटीक और तथ्य-आधारित खबरें प्रदान करता है। हमारी प्राथमिकता है जनता तक सही और निष्पक्ष जानकारी पहुँचाना, ताकि वे हर पहलू से जागरूक और अपडेटेड रहें।

Contact Us

Syed Sameer Irfan
📞 Phone: 94255 20244
📧 Email: sameerirfan2009@gmail.com
📍 Office Address: 88A, Street 5 Vivekanand Nagar, Bhilai 490023
📧 Email Address: cgnow.in@gmail.com
📞 Phone Number: 94255 20244

© 2025 cgnow.in. Designed by Nimble Technology.

error: Content is protected !!
Exit mobile version