डिजिटल दुनिया में बच्चों की सुरक्षा के लिए सरकार सख्त: कानून लागू, स्कूलों में विशेष जागरूकता अभियान जारी
नई दिल्ली:
सरकार डिजिटल प्रौद्योगिकियों के माध्यम से बच्चों के लिए शिक्षा और सूचना तक पहुंच बढ़ाने के साथ-साथ ऑनलाइन माध्यम से जुड़े जोखिमों को लेकर भी पूरी तरह सतर्क है। साइबरबुलिंग, ऑनलाइन दुर्व्यवहार, अश्लील सामग्री और अत्यधिक स्क्रीन समय जैसी समस्याओं से बच्चों को बचाने के लिए कानूनी ढांचे को बेहद मजबूत किया गया है। राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री सावित्री ठाकुर ने यह जानकारी साझा की।
कानूनी सुरक्षा और सख्त नियम
बच्चों को सुरक्षित ऑनलाइन माहौल देने के लिए सरकार ने कई प्रमुख कदम उठाए हैं:
आईटी अधिनियम, 2000 एवं नियम, 2021: इंटरनेट मध्यस्थों को बच्चों के लिए हानिकारक, अश्लील, निजता का उल्लंघन करने वाली या हिंसा फैलाने वाली सामग्री को हटाने और रोकने के लिए सख्त निर्देश दिए गए हैं।
डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण (DPDP) अधिनियम, 2023: बच्चों के व्यक्तिगत डेटा के उपयोग से पहले माता-पिता या कानूनी अभिभावकों की सत्यापित सहमति (Parental Consent) को अनिवार्य बनाया गया है। इसके तहत बच्चों की व्यवहार निगरानी (Behavioral Tracking) और उन्हें लक्षित विज्ञापनों (Targeted Ads) पर पूरी तरह रोक है।
I4C और राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल
गृह मंत्रालय ने भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) की स्थापना की है। नागरिक अपनी शिकायतें cybercrime.gov.in पोर्टल पर दर्ज करा सकते हैं, जहां बच्चों के खिलाफ होने वाले अपराधों पर विशेष प्राथमिकता दी जाती है।
NCPCR की पहल और राष्ट्रीय अध्ययन
राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) ने स्कूलों और अभिभावकों के लिए “ऑनलाइन सुरक्षित रहना” और साइबरबुलिंग रोकथाम संबंधी दिशानिर्देश जारी किए हैं। वर्ष 2025-26 के दौरान आयोग ने देशभर में क्षमता निर्माण कार्यक्रम और कार्यशालाएं आयोजित की हैं।
इससे पहले एनसीपीसीआर ने 6 राज्यों के 60 स्कूलों में 5,811 प्रतिभागियों (बच्चों, अभिभावकों और शिक्षकों) पर मोबाइल और इंटरनेट के शारीरिक व मनोसामाजिक प्रभावों का एक व्यापक राष्ट्रीय अध्ययन भी कराया था।
शिक्षा क्षेत्र में कदम
शिक्षा मंत्रालय के ‘प्रज्ञाता’ (PRAGYATA) दिशानिर्देश, सीबीएसई (CBSE) के साइबर क्लब व साइबर सुरक्षा हैंडबुक, और एनसीईआरटी (NCERT) द्वारा पाठ्यक्रम में साइबर सुरक्षा को शामिल करने जैसी पहल बच्चों को डिजिटल शिष्टाचार और सुरक्षित इंटरनेट उपयोग सिखाने में मदद कर रही हैं।


