रांची / बिलासपुर:
दशकों से भारतीय रेल के मुख्य नेटवर्क से अछूते रहे झारखंड के जनजातीय बहुल और सुदूरवर्ती इलाकों—सिमडेगा, गुमला और लोहरदगा—के लिए एक ऐतिहासिक मोड़ आ गया है। दक्षिण-पूर्व-मध्य रेलवे (SECR) के बिलासपुर रेल मंडल के तहत प्रस्तावित धरमजयगढ़–पत्थलगांव–लोहरदगा नई ब्रॉडगेज रेल लाइन (291.88 किमी) की डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) पूरी तरह तैयार हो चुकी है।लगभग ₹14,550 करोड़ (मूल्य वृद्धि सहित) की अनुमानित लागत वाली यह परियोजना न केवल छत्तीसगढ़ और झारखंड के बीच सीधी रेल कनेक्टिविटी स्थापित करेगी, बल्कि बिलासपुर से लोहरदगा के बीच का सफर 79 किलोमीटर छोटा कर देगी।
परियोजना की मुख्य विशेषताएं: एक नजर में
| प्रमुख बिंदु | विवरण |
| परियोजना का नाम | धरमजयगढ़-पत्थलगांव-लोहरदगा नई ब्रॉडगेज रेल लाइन |
| रेल मंडल / जोन | बिलासपुर मंडल (SECR) |
| कुल लंबाई | 291.881 किलोमीटर (झारखंड में ~144.5 किमी) |
| प्रस्तावित स्टेशन | 28 स्टेशन (जंक्शन, ओरिजिनेटिंग व हॉल्ट शामिल) |
| कुल अनुमानित लागत | ₹13,162.60 करोड़ (5% मूल्य वृद्धि सहित ₹14,550.53 करोड़) |
| आवश्यक कुल भूमि | 2,158.20 हेक्टेयर (1,662.58 हे. निजी, 495.61 हे. वन भूमि) |
| सुरक्षा संरचनाएं | 79 ROB/RUB (लेवल क्रॉसिंग शून्य), 218 बड़े व 55 छोटे पुल, 16 वायडक्ट, सुरंगें |
सफर होगा सुगम: 79 किमी की सीधी बचत
वर्तमान में बिलासपुर से लोहरदगा जाने के लिए ट्रेनों को राउरकेला होकर एक लंबा चक्कर लगाना पड़ता है, जिसकी कुल दूरी करीब 543 किलोमीटर है।नई लाइन बनने के बाद यह दूरी घटकर मात्र 464 किलोमीटर रह जाएगी। 79 किलोमीटर की दूरी कम होने से यात्री ट्रेनों के समय में कम से कम 2 से 3 घंटे की बचत होगी, साथ ही मालगाड़ियों के परिचालन खर्च में भारी कमी आएगी।यह नई रेल लाइन छत्तीसगढ़ के औद्योगिक और कोयला समृद्ध जिले रायगढ़ और जशपुर के पत्थलगांव से होते हुए झारखंड की सीमा में प्रवेश करेगी। इसके बाद यह सिमडेगा, गुमला और लोहरदगा जिलों को आपस में जोड़ते हुए मुख्य रेल नेटवर्क में विलीन हो जाएगी।
झारखंड और छत्तीसगढ़ के बीच प्रस्तावित धरमजयगढ़-पत्थलगांव-लोहरदगा नई रेल लाइन परियोजना के लिए जमीन अधिग्रहण की कवायद तेज हो गई है। दक्षिण-पूर्व-मध्य रेलवे (SECR) की इस महत्वाकांक्षी 291.88 किलोमीटर लंबी रेल परियोजना के लिए कुल 2,158.20 हेक्टेयर भूमि की आवश्यकता होगी, जिसमें लगभग 1,662.58 हेक्टेयर निजी और 495.61 हेक्टेयर वन भूमि शामिल है। सिमडेगा, गुमला और लोहरदगा जैसे जनजातीय और दूरदराज के क्षेत्रों को मुख्य रेल नेटवर्क से जोड़ने वाली इस परियोजना की डीपीआर तैयार होने के बाद अब संबंधित जिलों में भूमि सर्वे व भू-अधिग्रहण की प्रक्रिया को गति दी जा रही है, जिससे बिलासपुर से लोहरदगा की दूरी 79 किमी घटेगी और स्थानीय स्तर पर व्यापार, खनिज परिवहन तथा रोजगार के नए अवसर खुलेंगे।
‘जीरो लेवल क्रॉसिंग’ कॉरिडोर: सुरक्षा और रफ्तार का आधुनिक ढांचा
तकनीकी दृष्टि से इस कॉरिडोर को बेहद आधुनिक और सुरक्षित रूप में डिजाइन किया गया है:
मानव रहित फाटक मुक्त (Zero Level Crossing): पूरे 292 किलोमीटर के ट्रैक पर एक भी समपार फाटक (लेवल क्रॉसिंग) नहीं होगा। सड़क यातायात के लिए 79 रोड ओवरब्रिज (ROB) और रोड अंडरब्रिज (RUB) बनाए जाएंगे।
इंजीनियरिंग का कमाल: पहाड़ी और नदियों वाले इस इलाके में 1 बड़ा वाटरवे ब्रिज, 16 विशाल वायडक्ट (एलिवेटेड ट्रैक), 218 बड़े पुल, 55 छोटे पुल और कई आधुनिक रेल सुरंगें बनाई जाएंगी।
बॉक्साइट और कोयला ढुलाई को पंख, बदल जाएगी इलाके की आर्थिकी
रांची रेल मंडल के डीआरएम करुणानिधि सिंह के अनुसार, यह परियोजना इन तीन जिलों में सिर्फ रेल पटरियां नहीं बिछाएगी, बल्कि पूरे इलाके के सामाजिक और आर्थिक ताने-बाने को बदल कर रख देगी:गुमला-लोहरदगा की बॉक्साइट खदानों और छत्तीसगढ़ के कोयला व लौह अयस्क वाले क्षेत्रों को सीधा और सस्ता लॉजिस्टिक्स मार्ग मिलेगा। परियोजना के निर्माण और बाद में स्टेशन विकास से हजारों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार पैदा होंगे। सिमडेगा और गुमला जैसे जिलों के छात्र, मरीज और व्यापारी अब सीधे राजधानी रांची, बिलासपुर या रायपुर से जुड़ सकेंगे।
यह रेल लाइन छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले से शुरू होकर झारखंड के लोहरदगा तक जाएगी। इस मार्ग पर प्रमुख प्रस्तावित स्टेशन इस प्रकार हैं:
- छत्तीसगढ़: धरमजयगढ़, पत्थलगांव, कुनकुरी, जशपुर, लोदाम।
- झारखंड: रायडीह (पोगरा क्षेत्र), गुमला, टोटो, घाघरा, सेन्हा, लोहरदगा।


