छत्तीसगढ़ में मानसून की भारी सक्रियता और बंगाल की खाड़ी में बने अवदाब के चलते पूरे प्रदेश में जलप्रलय जैसी स्थिति बन गई है। राजधानी रायपुर, दुर्ग और राजिम समेत मध्य तथा उत्तर छत्तीसगढ़ में पिछले सारे रिकॉर्ड तोड़ते हुए मूसलाधार बारिश दर्ज की गई है। इस भारी वर्षा के कारण महानदी और शिवनाथ नदी सहित कई छोटे-बड़े नदी-नाले उफान पर आ गए हैं, जिससे बलौदाबाजार, महासमुंद, गरियाबंद और कोरबा जिलों में बाढ़ का गंभीर खतरा पैदा हो गया है।
बलौदाबाजार जिले में पिछले ३६ घंटों से लगातार हो रही बारिश के कारण पलारी तहसील के अमेठी घाट स्थित महानदी का एनीकट लगभग ५ से ७ फीट पानी में डूब गया है। तेज बहाव को देखते हुए प्रशासन ने इस मार्ग पर आवागमन पूरी तरह बंद कर दिया है और मौके पर पुलिस बल तैनात किया है। एनीकट के डूबने से कसडोल विकासखंड के वनांचल क्षेत्रों और महासमुंद जिले के सिरपुर क्षेत्र की ओर आने-जाने का सड़क संपर्क पूरी तरह टूट गया है। गरियाबंद जिले के राजिम में रिकॉर्ड तोड़ वर्षा होने से त्रिवेणी संगम लबालब भर चुका है, जिसके कारण तटीय और निचले इलाकों में रहने वाले ग्रामीणों को प्रशासन ने अलर्ट पर रखा है।
राजधानी रायपुर में हुई रिकॉर्ड तोड़ बारिश ने नगर निगम की मानसून पूर्व नाला सफाई की दावों की पोल खोलकर रख दी है। जलभराव के कारण शहर की सड़कें तालाब में तब्दील हो गईं और रिहाइशी कॉलोनियों के घरों तथा किचन तक में नालों का गंदा पानी भर गया, जिससे कई परिवारों के घरों में चूल्हे तक नहीं जल सके। इसके साथ ही बालोद जिले के ग्राम घुमका के पास जुझारा नाला उफान पर होने के बावजूद स्कूली बच्चे और वाहन चालक अपनी जान जोखिम में डालकर उसे पार कर रहे हैं। कोरबा जिले में भी भारी जलभराव से आवागमन बाधित हुआ है और करतला विकासखंड के भैसामुड़ा में जोगीनाला पर करोड़ों की लागत से बनी नई पुलिया पहली ही बारिश में ढह गई है, जिससे निर्माण की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
मौसम विभाग ने अगले ४८ घंटों के लिए मध्य और उत्तरी छत्तीसगढ़ में भारी बारिश और बिजली गिरने की सख्त चेतावनी जारी की है। प्रशासन ने सभी नागरिकों से उफनते नदी-नालों के पास न जाने और सुरक्षित स्थानों पर रहने की अपील की है। हालांकि, मौसम वैज्ञानिकों का अनुमान है कि ८ जुलाई के बाद बारिश की तीव्रता में कुछ कमी आएगी, जिससे स्थिति सामान्य होने की उम्मीद है। दूसरी तरफ, यह बारिश किसानों के लिए बेहद राहत भरी साबित हो रही है, जिससे खेतों में पानी जमा होने के बाद धान की बोनी और रोपा लगाने का काम तेजी से शुरू हो गया है।

