1 फरवरी 2026 से नई कारों के FASTag पर खत्म होगी KYC प्रक्रिया, वाहन चालकों को बड़ी राहत

छत्तीसगढ़ और झारखंड। मध्य भारत के इन दो प्रमुख राज्यों में हाथियों और इंसानों के बीच संघर्ष लगातार बढ़ रहा है और यह अब एक गंभीर सामाजिक-आर्थिक और वन्यजीव संकट बन चुका है। छत्तीसगढ़ में 2000 से 2023 के बीच 828 हाथी-मानव संघर्ष की घटनाएं दर्ज की गईं, जिनमें 737 लोगों की मौत हुई और 91 लोग घायल हुए। सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्र जशपुर रहा, जहां 152 मौतें और 19 घायल हुए। इसके बाद धरमजयगढ़, सूरजपुर और कोरबा जैसे क्षेत्र हैं। कुल 321 गांव इस संघर्ष से प्रभावित हुए, जिनमें जशपुर में 66 गांव प्रमुख हैं। मानसून के दौरान संघर्ष की घटनाएं सबसे अधिक होती हैं और पुरुषों में हताहत होने की संख्या महिलाओं की तुलना में अधिक रही है क्योंकि पुरुष अधिकतर खेतों में काम करते हैं और रात में गांवों की रखवाली करते हैं

झारखंड में 2000 से 2023 के बीच हाथियों के हमले की 1740 घटनाएं दर्ज हुईं, जिसमें 1340 लोगों की मौत हो चुकी है और 400 लोग घायल हुए। 2023 के बाद अब तक करीब 200 लोगों की जान हाथियों के कारण चली गई। रांची, खूंटी और पूर्वी सिंहभूम को संघर्ष का सबसे बड़ा हॉटस्पॉट माना गया है। रांची में अब तक 391 मौतें और 194 घायल होने के मामले सामने आए, खूंटी में 131 और पूर्वी सिंहभूम में 68 मौतें दर्ज हुई। झारखंड के लगभग 480 गांव इस समस्या से प्रभावित हैं, जिनमें रांची के 156 गांव प्रमुख हैं

मौसम बदला तो बदले अंडों के रेट, ट्रे की कीमत 240 के पार

हाल की घटनाओं में छत्तीसगढ़ के कई जिलों में हाथियों के हमले में मौतें और चोटें हुई हैं। झारखंड में दो जनवरी को चाईबासा में तीन लोगों की जान गई, दिसंबर में रामगढ़ के वेस्ट बोकारो और सिरका वन क्षेत्र में चार लोगों की मौत हुई। रांची के अनगड़ा ब्लॉक के जीदू गांव में शनिचरवा मुंडा की मौत हाथी के हमले में हो गई। पश्चिमी सिंहभूम जिले में खलिहान में सो रहे 13 वर्षीय बालक रेगा कयोम को हाथी कुचल कर मार डाला, वहीं 10 वर्षीय बच्ची गंभीर रूप से घायल हुई

हाथियों के आक्रामक होने के पीछे कई कारण हैं, जिनमें प्राकृतिक आवास का नुकसान, भोजन और पानी की कमी, और उनके पारंपरिक मार्गों में अवरोध प्रमुख हैं। छत्तीसगढ़ में खनन, सड़क निर्माण और शहरीकरण के कारण जंगलों का विखंडन हुआ है, जिससे हाथियों के प्राकृतिक गलियारों में बाधा आई। झारखंड में अवैध उत्खनन और औद्योगिक विकास ने उनके पारंपरिक रास्तों को रोक दिया
ECINet एप: निर्वाचन आयोग की नई डिजिटल पहल, 10 जनवरी तक नागरिक दे सकेंगे सुझाव

हाथियों के उत्पात से केवल जान ही नहीं बल्कि गरीब किसानों की फसलें भी तबाह होती हैं। उचित मुआवजा न मिलने पर ग्रामीण भी हाथियों को भगाने या अन्य गतिविधियों में भाग नहीं लेते। वन विभाग की पहल में एलीफेंट विलेज के माध्यम से जंगलों में तालाब और चारा रोपण, क्विक रिस्पांस टीमों द्वारा प्रशिक्षित कर्मचारियों की तैनाती और जागरूकता अभियान शामिल हैं, ताकि ग्रामीणों को हाथियों के व्यवहार और उनसे बचाव के तरीकों की जानकारी दी जा सके

पॉक्सो मामलों के निपटारे में छत्तीसगढ़ देश में अव्वल, 2025 में अदालतों ने दिखाई तेजी

पिछले आठ वर्षों में 60 हाथियों की मौत हुई, मुख्य कारण रेलवे लाइन और बिजली के तार हैं। औसतन हर वर्ष 80 से 100 लोगों की जान हाथियों के हमले में जाती है। वन विशेषज्ञों का कहना है कि हाथियों को उनके प्राकृतिक आवास में रहने का अधिकार है और ग्रामीणों को हाथियों के नजदीक जाने से बचना चाहिए। वन विभाग तकनीकी उपकरणों और टीमों के माध्यम से लगातार स्थिति पर नजर रख रहा है

साधारण नहीं था शनिवार का चांद, पूर्णिमा की रात बनी खास; नए साल के पहले सुपरमून ने देश को किया मंत्रमुग्ध

Share.

About Us

CG NOW एक भरोसेमंद और निष्पक्ष न्यूज़ प्लेटफॉर्म है, जो आपको छत्तीसगढ़, भारत और दुनिया भर की ताज़ा, सटीक और तथ्य-आधारित खबरें प्रदान करता है। हमारी प्राथमिकता है जनता तक सही और निष्पक्ष जानकारी पहुँचाना, ताकि वे हर पहलू से जागरूक और अपडेटेड रहें।

Contact Us

Syed Sameer Irfan
📞 Phone: 94255 20244
📧 Email: sameerirfan2009@gmail.com
📍 Office Address: 88A, Street 5 Vivekanand Nagar, Bhilai 490023
📧 Email Address: cgnow.in@gmail.com
📞 Phone Number: 94255 20244

© 2025 cgnow.in. Designed by Nimble Technology.

error: Content is protected !!
Exit mobile version