जशपुर जिले के बगीचा थाना क्षेत्र में एक ही भूमि को बार-बार बेचने और फर्जी दस्तावेजों के जरिए न्यायालय व राजस्व विभाग को गुमराह करने का गंभीर मामला सामने आया है।
बगीचा पुलिस ने इस मामले में तीन आरोपियों—लीलाधर, बंशीधर और परमानंद—के खिलाफ एफआईआर (क्रमांक 0164/2026) दर्ज की है। अतिरिक्त तहसीलदार श्रीमती उषा सिंह द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत के अनुसार, आरोपियों ने फर्जी दस्तावेज तैयार कर न्यायालय के आदेशों की अवहेलना की है। जांच में खुलासा हुआ कि वर्ष 2010 में ही खसरा नंबर 49/4 की जमीन बंशीधर द्वारा अशोक कुमार अग्रवाल को बेची जा चुकी थी, लेकिन वारिसों के समय पर नामांतरण न हो पाने का लाभ उठाकर आरोपियों ने राजस्व रिकॉर्ड में हेरफेर की।
धोखाधड़ी का यह सिलसिला तब और गहरा गया जब 15 जुलाई 2022 को तहसीलदार न्यायालय द्वारा वारिस विवेक अग्रवाल के पक्ष में नामांतरण का आदेश पारित करने के मात्र दो दिन पहले, बंशीधर ने उक्त जमीन का एक हिस्सा अपने भाई लीलाधर को बेच दिया। इतना ही नहीं, वर्ष 2010 में भगवानों राम यादव को बेची गई 0.429 हेक्टेयर भूमि (नया खसरा नंबर 49/7) को भी आरोपियों ने तहसील न्यायालय में ‘त्रुटि सुधार’ का आवेदन देकर बिना उन्हें सुने मूल खसरा नंबर 49/4 में वापस जुड़वा लिया। अंततः, इस भूमि को बंशीधर के पुत्र परमानंद के नाम पंजीकृत करवा दिया गया।
इस पूरे मामले की पोल 30 मई 2025 को टटकेला में आयोजित ‘सुशासन तिहार’ शिविर के दौरान खुली, जब पीड़ितों ने आवेदन देकर न्याय की गुहार लगाई। विभागीय जांच में धोखाधड़ी की पुष्टि होने के बाद अतिरिक्त तहसीलदार ने पुलिस को कार्रवाई के निर्देश दिए। वर्तमान में बगीचा पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(2), 336, 338, 339 एवं 61(2)(a) के तहत अपराध पंजीबद्ध कर लिया है और साक्ष्यों के आधार पर वैधानिक कार्रवाई की जा रही है।

