नई दिल्ली | 26 मार्च 2026
अगर आप भी होटल या रेस्तरां में खाना खाने के शौकीन हैं, तो यह खबर आपके लिए बहुत जरूरी है। अक्सर देखने में आता है कि खाने के बिल में खाने की कीमत और टैक्स के अलावा ‘LPG शुल्क’, ‘गैस सरचार्ज’ या ‘ईंधन लागत’ जैसे अजीबोगरीब चार्ज जोड़ दिए जाते हैं। केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) ने इस चालाकी का कड़ा संज्ञान लिया है और इसे उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के तहत एक ‘अनुचित व्यापार व्यवहार’ (Unfair Trade Practice) करार दिया है। प्राधिकरण ने साफ़ कर दिया है कि होटल मालिक अपनी जेब भरने के लिए ग्राहकों पर ऐसा कोई भी अतिरिक्त बोझ चुपके से नहीं डाल सकते।
प्राधिकरण ने नई एडवाइजरी जारी करते हुए स्पष्ट किया है कि व्यवसाय चलाने के लिए इस्तेमाल होने वाली गैस, बिजली या अन्य ईंधन का खर्च होटल के परिचालन व्यय (Operational Cost) का हिस्सा है। इसे अलग से वसूलने के बजाय मेनू कार्ड में खाने की कीमतों में ही शामिल किया जाना चाहिए। बिल में इसे अलग से ‘डिफ़ॉल्ट’ या ‘ऑटोमैटिक’ तरीके से जोड़ना पूरी तरह से गैर-कानूनी है। सीसीपीए ने पाया कि कई रेस्तरां पुराने ‘सेवा शुल्क’ (Service Charge) के नियमों से बचने के लिए अब इन नए नामों का सहारा ले रहे थे, जिस पर अब लगाम कस दी गई है।
अब नियम यह है कि मेनू कार्ड में जो कीमत लिखी है, वही अंतिम कीमत होगी। इसमें केवल सरकार द्वारा निर्धारित लागू टैक्स (जैसे GST) ही अलग से जोड़ा जा सकता है। उपभोक्ताओं को गुमराह करना या उन्हें किसी भी ऐसे शुल्क के लिए मजबूर करना जो उनकी मर्जी से न हो, अब भारी पड़ सकता है। सरकार ने होटलों को चेतावनी दी है कि अगर वे इन निर्देशों का उल्लंघन करते हैं, तो उन पर उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के तहत कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
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अगर आपसे वसूला जाए एक्स्ट्रा चार्ज, तो क्या करें?
अगर किसी होटल के बिल में आपको ऐसे संदिग्ध चार्ज दिखते हैं, तो सबसे पहले आप होटल प्रबंधन से उसे हटाने का अनुरोध कर सकते हैं। यदि वे नहीं मानते, तो आप तुरंत 1915 पर कॉल करके या ‘नेशनल कंज्यूमर हेल्पलाइन’ (NCH) ऐप के जरिए शिकायत दर्ज करा सकते हैं। इसके अलावा उपभोक्ता ‘ई-जाग्रति’ पोर्टल के माध्यम से भी अपनी शिकायत संबंधित उपभोक्ता आयोग तक पहुँचा सकते हैं। आप चाहें तो सीधे जिला कलेक्टर या सीसीपीए को भी अपनी शिकायत सौंप सकते हैं। सरकार अब पूरे देश में ऐसी शिकायतों पर बारीकी से नजर रख रही है ताकि ग्राहकों के हितों की रक्षा की जा सके।
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