सेंसर और मोबाइल ऐप से होगी पानी की चोरी और बर्बादी की निगरानी

छत्तीसगढ़ में 6,800 से अधिक जल निकायों का हुआ कायाकल्प

विश्व जल दिवस: छत्तीसगढ़ के 10 जिलों में जल संकट; रायपुर-दुर्ग में सूखते हलक और सरगुजा-जशपुर में ‘झरिया’ बचाने की जंग

नई दिल्ली/रायपुर | 23 मार्च 2026

भारत सरकार ने ग्रामीण इलाकों में ‘हर घर जल’ के संकल्प को और अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाने के लिए अब तकनीक का सहारा लेना शुरू कर दिया है। जल शक्ति मंत्रालय ने राज्यों के साथ मिलकर “जल सेवा आंकलन” नामक एक नई पहल की शुरुआत की है, जिसके तहत अब जल आपूर्ति की निगरानी केवल कागजी आंकड़ों तक सीमित नहीं रहेगी। इस नई व्यवस्था में ग्राम जल एवं स्वच्छता समिति द्वारा गांव के स्तर पर विस्तृत आकलन किया जाएगा, जिसे पंचायत सचिव सीधे डिजिटल पोर्टल पर अपलोड करेंगे। इस डेटा की शुद्धता सुनिश्चित करने के लिए ‘आईओटी’ (IoT) उपकरणों और सेंसर का उपयोग किया जा रहा है, जो दुर्गम और पहाड़ी क्षेत्रों में भी पानी के बहाव और गुणवत्ता की सटीक जानकारी वास्तविक समय (Real-time) में मुख्यालय तक पहुँचाएंगे। मैन्युअल निगरानी की जगह अब इन स्वचालित प्रणालियों के आने से जल प्रबंधन में मानवीय गलतियों की गुंजाइश खत्म हो गई है।

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पारदर्शिता की इस मुहिम को और मजबूती देने के लिए पेयजल और स्वच्छता विभाग ने ‘सुजलम भारत ऐप’ के जरिए जल संपत्तियों की जियो-टैगिंग शुरू कर दी है, जिससे अब हर पाइपलाइन और पानी की टंकी का स्थान ‘पीएम-गतिशक्ति पोर्टल’ पर मैप किया जा रहा है। इसके साथ ही सरकार NAQUIM 2.0 के माध्यम से गांव-स्तरीय वैज्ञानिक मानचित्रण कर रही है, ताकि भूजल का बेहतर प्रबंधन किया जा सके और जल-संकटग्रस्त क्षेत्रों में खेती के लिए पानी की उपलब्धता सुनिश्चित हो सके। इस आधुनिक तकनीक का सबसे बड़ा लाभ यह है कि अब ‘आधार’ को बैंक खातों से जोड़कर लाभार्थियों का बहु-स्तरीय सत्यापन किया जा रहा है, जिससे भ्रष्टाचार की संभावनाओं को पूरी तरह समाप्त करने का प्रयास किया गया है।

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छत्तीसगढ़ में भी जल संरक्षण और प्रबंधन की दिशा में उल्लेखनीय प्रगति देखी गई है। जल शक्ति अभियान ‘कैच द रेन’ के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, प्रदेश में अब तक 6,879 पारंपरिक जल निकायों का सफलतापूर्वक नवीनीकरण किया जा चुका है। इसके अतिरिक्त, राज्य में जल पुनर्भरण के लिए 8,903 नई संरचनाएं बनाई गई हैं और 18,164 से अधिक कार्य जलागम विकास (Watershed Development) के तहत पूरे किए गए हैं। पर्यावरण को संतुलित रखने के लिए छत्तीसगढ़ में 51,631 से अधिक पौधों का रोपण कर गहन वनीकरण अभियान भी चलाया गया है। यह समेकित प्रयास न केवल छत्तीसगढ़ के ग्रामीण इलाकों में पानी की किल्लत को दूर करेंगे, बल्कि ‘जन भागीदारी’ के माध्यम से जल संचय को एक जन-आंदोलन बनाने की दिशा में भी निर्णायक साबित होंगे।

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