स्वतंत्रता दिवस से पूर्व रायपुर के पंडित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में संस्कृति विभाग के सहयोग से ‘आजादी की धुन’ समारोह का भव्य आयोजन किया गया। इस विशेष कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ के अलग-अलग अंचलों से आए 100 युवा कलाकारों ने विभिन्न वाद्ययंत्रों के साथ एक साथ लाइव बैंड प्रस्तुति दी। प्रदेश में पहली बार हुए इस अनूठे प्रयास और देशभक्ति के गीतों की मनमोहक प्रस्तुतियों ने पूरे जनसमूह को राष्ट्रप्रेम के भाव से सराबोर कर दिया।
संगीत की शक्ति और स्वतंत्रता सेनानियों का स्मरण
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने समारोह में शामिल होकर युवा कलाकारों का उत्साहवर्धन किया। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि संगीत में लोगों को एक सूत्र में जोड़ने की अद्भुत शक्ति होती है। भारतीय स्वाधीनता संग्राम में भी गीतों, कविताओं और नारों ने क्रांतिकारियों का मनोबल बढ़ाया था। मुख्यमंत्री ने महात्मा गांधी, नेताजी सुभाष चंद्र बोस, सरदार पटेल, वीर सावरकर और बाबा साहेब अंबेडकर जैसे राष्ट्रनायकों के संघर्षों को याद करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की।
स्वतंत्रता संग्राम में छत्तीसगढ़ के वीर सपूतों का योगदान
मुख्यमंत्री ने छत्तीसगढ़ की पावन धरा के स्वाधीनता संग्राम में योगदान को रेखांकित किया। उन्होंने अमर शहीद वीर नारायण सिंह के बलिदान और बस्तर में भूमकाल आंदोलन का नेतृत्व करने वाले जननायक वीर गुण्डाधुर के शौर्य का स्मरण कराया। उन्होंने कहा कि इन वीर सपूतों का बलिदान प्रदेश की गौरवशाली विरासत है, जिससे प्रेरणा लेकर युवा पीढ़ी को राष्ट्र निर्माण में अपनी सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।
‘विकसित भारत’ और ‘विकसित छत्तीसगढ़’ का संकल्प
समारोह में मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के संकल्प को दोहराया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ‘विकसित छत्तीसगढ़’ के विजन के साथ काम कर रही है ताकि विकास की रोशनी हर गांव और परिवार तक पहुंचे। कार्यक्रम के अंत में मुख्यमंत्री ने सभी कलाकारों, युवाओं और उपस्थित गणमान्य नागरिकों को हरेली पर्व एवं स्वतंत्रता दिवस की अग्रिम शुभकामनाएं दीं।

