मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय आज जशपुर में विभिन्न कार्यक्रम में करेंगे शिरकत
जशपुर। जशपुर जिले के वनांचलों में इन दिनों एक अज्ञात वन्य जीव की आहट ने ग्रामीणों की नींद उड़ा दी है। विशेषकर चराईडांड क्षेत्र के दमेरा पर्यटन स्थल के निचले गांवों में “शेर” देखे जाने की चर्चाएं जोरों पर हैं। जानकारी के अनुसार दिसम्बर माह में बाघमारा क्षेत्र में कुछ पालतू पशुओं के मारे जाने की खबर के बाद ये अफवाह फैली जनवरी में भी बनी रही, हालांकि वन विभाग ने इन खबरों को फिलहाल महज एक अफवाह करार दिया है।
ग्रामीणों में खौफ, मवेशियों पर
स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, पिछले कुछ दिनों में चार से पांच मवेशियों (गाय-बकरी) का शिकार किया गया है। ग्रामीणों का दावा है कि रात के सन्नाटे में जंगल से दहाड़ सुनाई देती है। चराईडांड बाजार पहुंचे ग्रामीणों ने बताया कि इस डर के कारण शाम ढलते ही बस्तियों में सन्नाटा पसर जाता है और लोग घरों से बाहर निकलने में कतरा रहे हैं।
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शेर या तेंदुआ? असमंजस की स्थिति
वन्यजीवों को लेकर ग्रामीणों की राय बंटी हुई है। जहाँ कुछ लोग इसे शेर बता रहे हैं, वहीं कुछ का मानना है कि यह तेंदुआ हो सकता है। पूर्व में भी दमेरा के ऊपरी क्षेत्र ‘बाघ मारा’ में तेंदुए द्वारा मवेशियों के शिकार की घटनाएं सामने आ चुकी हैं, जिससे ग्रामीणों का शक गहरा गया है।
“शेर की पुष्टि नहीं”
इस मामले पर वन विभाग ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि क्षेत्र में शेर की मौजूदगी के कोई साक्ष्य नहीं मिले हैं।
“एसडीओ करण सिंह के मुताबिक, “गुल्लू क्षेत्र में एक तेंदुए की सक्रियता की जानकारी है, लेकिन चराईडांड या आसपास शेर की मौजूदगी की कोई सूचना नहीं है। अब तक किसी भी कैमरा ट्रैप या पगमार्क (पंजों के निशान) से इसकी पुष्टि नहीं हुई है।”
विभाग ने ग्रामीणों से अपील की है कि वे सोशल मीडिया या सुनी-सुनाई अफवाहों पर ध्यान न दें, हालांकि सावधानी बरतने की सलाह जरूर दी गई है।
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जानकारों का मानना है कि जशपुर के घने जंगल, जल स्रोत और शिकार की उपलब्धता बड़े मांसाहारी जीवों के लिए अनुकूल हैं। यदि भविष्य में यहाँ शेर या बाघ की मौजूदगी मिलती है, तो यह जैव विविधता के लिए बड़ी बात होगी। लेकिन वर्तमान में, हाथियों के बाद अब इस नई दहशत ने मानव-वन्यजीव संघर्ष की चिंता बढ़ा दी है।

