नई दिल्ली: त्योहारी सीजन के दौरान ऑनलाइन खाने-पीने का सामान मंगाने वाले उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य को लेकर खाद्य सुरक्षा नियामक सख्त हो गया है। भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने नियमों के उल्लंघन, भ्रामक दावों और प्रतिबंधित खाद्य पदार्थों की ऑनलाइन बिक्री को लेकर ऐमजॉन, फ्लिपकार्ट इंडिया, स्विगी इंस्टामार्ट, बिगबास्केट और जेप्टो सहित कई प्रमुख ई-कॉमर्स व क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई शुरू कर दी है।
नियामक ने स्पष्ट किया है कि खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के तहत उपभोक्ताओं को गुमराह करने वाली ब्रांडिंग और सेहत को नुकसान पहुंचाने वाले पदार्थों को ऑनलाइन प्रदर्शित या बेचना कानूनन अपराध है।
किन उत्पादों और दावों पर फंसीं कंपनियां?
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प्रतिबंधित ‘धतूरा’ की ऑनलाइन बिक्री: एफएसएसएआई ने सबसे गंभीर आपत्ति ‘धतूरा के फल/बीज’ को ऑनलाइन सूचीबद्ध और बिक्री के लिए पेश करने पर जताई है। स्वास्थ्य के लिए बेहद विषैले और हानिकारक माने जाने वाले धतूरे को प्लेटफॉर्म पर बेचने के मामले में ऐमजॉन सेलर सर्विसेज, स्विगी इंस्टामार्ट और बिगबास्केट सीधे घेरे में आए हैं।
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‘हैप्पिलो’ उत्पाद पर झूठे दावे: नियामक के मुताबिक, ऐमजॉन, फ्लिपकार्ट इंडिया, स्विगी इंस्टामार्ट, जेप्टो और बिगबास्केट—इन पांचों प्लेटफॉर्म्स ने ‘हैप्पिलो प्रीमियम डेट बाइट्स – जेस्टी ऑरेंज’ (Happilo Premium Date Bites – Zesty Orange) से जुड़े भ्रामक और असत्यापित दावे प्रदर्शित किए थे, जिसको लेकर इनके खिलाफ दंडात्मक प्रक्रिया शुरू की गई है।
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मिल्की मिस्ट के डेयरी उत्पादों पर कार्रवाई: स्विगी इंस्टामार्ट और बिगबास्केट पर ‘मिल्की मिस्ट’ के उत्पादों को लेकर नियमों के उल्लंघन का मामला दर्ज किया गया है। इसमें ‘मिल्की मिस्ट फ्रेश लो फैट क्रीम’, ‘मिल्की मिस्ट फार्म फ्रेश कर्ड’ और ‘मिल्की मिस्ट ग्रीक योगर्ट’ शामिल हैं। इन उत्पादों के लेबल, पोषक तत्वों और उत्पाद संबंधी विवरण में भ्रामक जानकारी प्रदर्शित पाई गई।
6 महीने से लगातार कड़ा रुख
खाद्य नियामक ने पिछले छह महीनों में क्विक-कॉमर्स और ऑनलाइन डिलीवरी कंपनियों पर अपनी निगरानी काफी कड़ी कर दी है। त्योहारी सीजन में जब ऑनलाइन ग्रॉसरी और मिठाई-स्नैक्स की मांग चरम पर होती है, तब किसी भी तरह के मिलावटी, प्रतिबंधित या मिसब्रांडेड सामान की आपूर्ति को रोकने के लिए FSSAI अब सोशल मीडिया और आधिकारिक नोटिसों के जरिए जनता को भी जागरूक कर रहा है।
प्राधिकरण ने स्पष्ट किया है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म केवल बिचौलिया होने का बहाना बनाकर खाद्य सुरक्षा मानकों की अनदेखी नहीं कर सकते; उन्हें अपने कैटलॉग पर बिकने वाले हर सामान की वैधानिक जांच सुनिश्चित करनी होगी।
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